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Health- ब्रह्म मुहूर्त में जागना स्वास्थ्य और दीर्घायु की कुंजी- आयुर्वेद

Anuj Kumar
Anuj Kumar
Health- ब्रह्म मुहूर्त में जागना स्वास्थ्य और दीर्घायु की कुंजी- आयुर्वेद

नई दिल्ली । मानव शरीर एक निश्चित लय यानी रिदम के अनुसार कार्य करता है। जब यह लय संतुलित रहती है, तो बीमारियों का शरीर में प्रवेश कठिन हो जाता है। वैज्ञानिक इसे सर्कैडियन रिदम (Circadian Rhythm) कहते हैं, जबकि आयुर्वेद में इसे दिनचर्या के रूप में जाना जाता है। आयुर्वेदिक दिनचर्या का पालन कर शरीर को न केवल मजबूत बनाया जा सकता है, बल्कि लंबे समय तक रोगमुक्त भी रखा जा सकता है।

ब्रह्म मुहूर्त में दिन की शुरुआत सबसे श्रेष्ठ

आयुर्वेद के अनुसार दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त (Wee hours) में करना सबसे उत्तम माना गया है। सुबह जल्दी उठने से शरीर और मन दोनों में ताजगी बनी रहती है।

तांबे का पानी और नाभि में तेल के फायदे

शौच आदि के बाद तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होता है। इसके बाद त्वचा और बालों की सेहत के लिए नाभि में तेल की कुछ बूंदें डालना लाभकारी माना गया है।आंखों की सुरक्षा और दृष्टि सुधार के लिए अंजन करने की परंपरा भी आयुर्वेद में बताई गई है। सुबह के समय हल्का व्यायाम या सैर शरीर को सक्रिय बनाती है और दिनभर ऊर्जा बनाए रखने में मदद करती है।

अभ्यंग से रक्त संचार और स्फूर्ति

इसके बाद अभ्यंग यानी पूरे शरीर में तेल मालिश करना बेहद जरूरी माना गया है। इससे रक्त संचार बेहतर होता है, मांसपेशियों की थकान दूर होती है और शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है।

आहार को माना गया जीवन का आधार

आयुर्वेद में आहार को जीवन का आधार माना गया है। भोजन केवल भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि शरीर को ऊर्जा देने का प्रमुख स्रोत है।

दोपहर का भोजन पाचन के लिए सबसे उत्तम समय

दोपहर का भोजन 12 से 1 बजे के बीच करना सबसे उपयुक्त बताया गया है, क्योंकि इस समय पाचन शक्ति यानी जठराग्नि सबसे मजबूत होती है और भोजन आसानी से पच जाता है।

हल्का रात्रि भोजन और सही पाचन

रात का भोजन हमेशा हल्का होना चाहिए और सूर्यास्त के बाद भोजन करने से यथासंभव बचना चाहिए। खाना खाने के बाद तुरंत लेटने की बजाय कुछ कदम टहलना या थोड़ी देर वज्रासन में बैठना पाचन के लिए फायदेमंद होता है।

अच्छी नींद से शरीर करता है खुद की मरम्मत

दिनचर्या का सबसे अहम हिस्सा नींद है। नींद के दौरान शरीर खुद की मरम्मत करता है और ऊर्जा को फिर से संचित करता है।

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गहरी नींद के लिए आयुर्वेदिक उपाय

रात को अच्छी और गहरी नींद के लिए दूध के साथ त्रिफला या हल्दी लेना उपयोगी माना गया है। सोते समय बाईं करवट में लेटना भी लाभकारी होता है, क्योंकि इससे रक्त संचार बेहतर रहता है और नींद गहरी आती है।

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