Breaking News: America: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने लगातार तीसरी बार घटाई ब्याज दरें

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फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में की कटौती

वाशिंगटन: अमेरिका(America) के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व (Fed), ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट्स (0.25%) की कटौती की घोषणा की है। इस कटौती के बाद, अब ब्याज दरें 3.50% से 3.75% के बीच रहेंगी। यह कदम मुख्य रूप से श्रम बाज़ार(Labor Market) में नरमी (लेबर मार्केट में नरमी) और बढ़ी हुई महंगाई को देखते हुए उठाया गया है। यह लगातार तीसरा मौका है जब फेड ने ब्याज दरों में कटौती की है। इससे पहले, 17 सितंबर और 29 अक्टूबर को भी कटौती की गई थी। इस निर्णय के पक्ष में फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने 9-3 से वोट किया, जो यह दर्शाता है कि यह कटौती मतभेद के बीच की गई है

भारत और वैश्विक बाज़ारों पर असर

फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती का असर न सिर्फ अमेरिकी(America) बाज़ारों पर, बल्कि भारत जैसे उभरते बाज़ारों पर भी सकारात्मक हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में उधार लेना सस्ता होने से वहाँ की कंपनियाँ ज्यादा निवेश कर सकती हैं, जिससे अमेरिकी शेयर बाज़ारों को बल मिलेगा। भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए यह इसलिए अच्छी खबर है, क्योंकि अमेरिकी दरों में कमी से विदेशी निवेशक अधिक रिटर्न की तलाश में यहाँ का रुख कर सकते हैं, जिससे विदेशी निवेश बढ़ने की संभावना है। फेड चेयर जेरोम पॉवेल ने संकेत दिया है कि आगे की कटौती तभी होगी जब लेबर मार्केट में ‘मटेरियल डिटिरियरेशन’ देखने को मिलेगा।

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पॉलिसी रेट: महंगाई नियंत्रण का मजबूत हथियार

पॉलिसी रेट, जिसे सेंट्रल बैंक (जैसे भारत में RBI या अमेरिका(America) में फेड) द्वारा निर्धारित किया जाता है, महंगाई को काबू करने का एक मजबूत उपकरण है। जब महंगाई बढ़ जाती है, तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर बाज़ार में पैसों के बहाव को कम करता है। इससे बैंकों को महंगा कर्ज़ मिलता है और वे ग्राहकों को भी ऊँची दरों पर लोन देते हैं, जिससे मांग घटती है और महंगाई कम होती है। इसके विपरीत, जब अर्थव्यवस्था को सहारा देने की आवश्यकता होती है, तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों और ग्राहकों को सस्ता कर्ज़ मिलता है, बाज़ार में पैसा बढ़ता है और अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।

फेडरल रिजर्व ने लगातार तीसरी बार ब्याज दर में कटौती क्यों की?

फेडरल रिजर्व ने यह कटौती मुख्य रूप से लेबर मार्केट में नरमी (जॉब मार्केट की कमजोरी) और बढ़ी हुई महंगाई को नियंत्रित करने के उद्देश्य से की है। यह कटौती अर्थव्यवस्था को मुश्किल दौर से उबारने और उसे गति देने के लिए की जाती है।

फेड की ब्याज दर कटौती से भारत पर क्या सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है?

अमेरिकी दरों में कमी से भारत जैसे उभरते बाज़ारों में विदेशी निवेश बढ़ सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि निवेशक कम रिटर्न वाले अमेरिकी बाज़ार से निकलकर अधिक लाभ की उम्मीद में भारतीय बाज़ारों में निवेश करते हैं।

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Dhanarekha

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