बेंगलुरु के कैफे का अजीबोगरीब बिल वायरल, LPG नियमों में भी बड़ा बदलाव
बेंगलुरु: देश में जारी गैस किल्लत(Gas Crisis Fee) के बीच बेंगलुरु के ‘थियो कैफे’ का एक बिल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कैफे ने एक ग्राहक से दो गिलास नींबू पानी के ₹358 के बिल पर 5% ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ के रूप में ₹17 अतिरिक्त वसूल लिए। इस मामले के सामने आने के बाद इंटरनेट यूजर्स(Internet Users) कैफे की जमकर आलोचना कर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि आखिर बिना गैस के बनने वाले नींबू पानी पर यह शुल्क किस आधार पर लगाया गया है।
एक घर में दो तरह के गैस कनेक्शन रखने पर लगेगा प्रतिबंध
दूसरी ओर, सरकार ने गहराते गैस संकट(Gas Crisis Fee) को देखते हुए सप्लाई के नियमों में कड़े बदलाव किए हैं। अब उन घरों में LPG सिलेंडर रखना गैर-कानूनी होगा जहाँ पहले से ही पाइप गैस (PNG) कनेक्शन मौजूद है। नए नियमों के मुताबिक, PNG यूजर्स को अपना पुराना LPG सिलेंडर सरेंडर करना होगा और वे नए सिलेंडर की रिफिलिंग भी नहीं करा सकेंगे। सरकार का उद्देश्य उन लोगों तक सिलेंडर पहुँचाना है जिनके पास खाना पकाने का कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
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राहत की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच कतर से LPG लेकर पहला भारतीय जहाज ‘शिवालिक’
गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुँच गया है। इस जहाज में लगभग 46 हजार मीट्रिक टन गैस लदी है, जो करीब 32.4 लाख घरेलू सिलेंडरों के बराबर है। इसके साथ ही सरकार ने कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई पर लगी रोक भी हटा दी है, जिससे आने वाले दिनों में बाजार और रेस्तरां में गैस की उपलब्धता में सुधार होने की उम्मीद है।
सरकार के नए नियमों के अनुसार किन लोगों को अपना LPG सिलेंडर सरेंडर करना होगा?
नए नियमों के अनुसार, जिन उपभोक्ताओं के घर में पाइप गैस(Gas Crisis Fee) कनेक्शन एक्टिव है, उन्हें अपना घरेलू LPG सिलेंडर तुरंत सरेंडर करना होगा। अब एक ही घर में PNG और LPG दोनों कनेक्शन रखना गैर-कानूनी माना जाएगा।
मिडिल-ईस्ट संकट के बीच भारत पहुँचे पहले LPG जहाज का नाम क्या है और इसमें कितनी गैस है?
भारत पहुँचने वाले पहले LPG जहाज का नाम ‘शिवालिक’ है। यह कतर से करीब 46 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुँचा है, जो लगभग 32.4 लाख घरेलू सिलेंडरों के बराबर है।
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