Pilots: पायलटों की मौत से विमानन क्षेत्र में हड़कंप

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थकान और सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

नई दिल्ली: भारत के विमानन उद्योग में पिछले 48 घंटों के भीतर दो पायलटों(Pilots) की अचानक हार्ट अटैक से मौत ने सुरक्षा मानकों पर बहस छेड़ दी है। एअर इंडिया के एक पायलट की बाली में रेस्ट के दौरान और अकासा एयर के एक युवा पायलट की बेंगलुरु में ट्रेनिंग के दौरान मृत्यु हो गई। द एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस पर कड़ी चिंता जताते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को पत्र लिखा है। एसोसिएशन का दावा है कि 45 साल से कम उम्र के पायलटों की मौत अत्यधिक थकान (Fatigue) और काम के बढ़ते दबाव का सीधा संकेत है

नियमों की अनदेखी: FDTL प्रावधानों और छूट पर विवाद

पायलटों की मांग है कि ‘फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन’ (FDTL) नियमों को बिना किसी ढील के सख्ती से लागू किया जाए। वर्तमान में, एयरलाइंस को ऑपरेशनल दिक्कतों के नाम पर नियमों में बार-बार छूट दी जा रही है, जो अब एक सामान्य चलन बन गया है। पायलटों को मिलने वाला अनिवार्य 48 घंटे का ‘वीकली रेस्ट’ भी अक्सर बाधित होता है। एसोसिएशन का आरोप है कि एयर इंडिया और इंडिगो जैसी बड़ी कंपनियों को दी गई विशेष राहतें कमर्शियल मुनाफे को तो बढ़ाती हैं, लेकिन क्रू की सेहत और यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं।

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पायलटों की कमी और डेटा पारदर्शिता की मांग

भारत में वर्तमान में लगभग 25,000 लाइसेंस प्राप्त पायलट हैं, जबकि विमानों के बढ़ते बेड़े को देखते हुए 30,000 पायलटों की तत्काल आवश्यकता है। इस कमी के कारण मौजूदा स्टाफ पर अतिरिक्त काम का बोझ डाला जा रहा है। आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी के अनुसार, एयरलाइंस पायलटों द्वारा दी जाने वाली थकान की रिपोर्ट को स्वीकार करने में सुस्ती दिखाती हैं। अब मांग की जा रही है कि एयरलाइंस द्वारा जमा किए जाने वाले ‘क्वाटरली फटीग डेटा’ को सार्वजनिक किया जाए ताकि सिस्टम में पारदर्शिता आए और पायलटों के जीवन की रक्षा हो सके।

FDTL नियम क्या हैं और पायलट इनकी सख्ती से मांग क्यों कर रहे हैं?

FDTL का अर्थ ‘फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन’ है, जो पायलटों के उड़ने के घंटों और उनके आराम की अवधि को निर्धारित करता है। पायलट इसकी सख्ती से मांग कर रहे हैं ताकि थकान के कारण होने वाली दुर्घटनाओं और पायलटों के गिरते स्वास्थ्य (जैसे हार्ट अटैक) को रोका जा सके।

भारत में वर्तमान में पायलटों की संख्या कितनी है और भविष्य में कितने की आवश्यकता है?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में भारत में 25,001 लाइसेंस प्राप्त पायलट हैं। हालांकि, एयरबस और बोइंग को दिए गए भारी विमानों के ऑर्डर के कारण भविष्य में भारत को कम से कम 30,000 पायलटों की आवश्यकता होगी।

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Dhanarekha

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