Jitiya Vrat: जितिया व्रत के नियम और परंपराएं

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संतान की लंबी आयु हेतु व्रत

जितिया व्रत(Jitiya Vrat) हर साल आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी तिथि पर किया जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान(Children) की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। भविष्य पुराण(Bhavishya Purana) के अनुसार, इस कठिन व्रत के नियमों का सही पालन करने से व्रती को पूर्ण फल प्राप्त होता है। इसलिए व्रत से पहले और व्रत के दिन कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना अनिवार्य माना गया है

नहाय-खाय और ओठगन की परंपरा

जितिया व्रत(Jitiya Vrat) इस बार 14 सितंबर, रविवार को रखा जाएगा और इसका पारण 15 सितंबर को होगा। व्रती महिलाओं को एक दिन पहले से तामसिक भोजन त्याग देना चाहिए। नहाय-खाय के दिन महिलाएं नदी या तालाब में स्नान करती हैं और झिमनी के पत्तों पर पूजा कर जीमूतवाहन भगवान का आह्वान करती हैं। झिमनी उपलब्ध न हो तो केले के पत्तों का उपयोग किया जाता है।

स्नान और पूजा के बाद सरसों के तेल की खली संतान के सिर पर लगाकर आशीर्वाद देने की परंपरा है। सप्तमी तिथि पर मडुआ की रोटी और मछली खाने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है। वहीं, मांसाहार न करने वाले परिवारों में सात्विक भोजन लिया जाता है। इस दिन भारी और तैलीय भोजन से बचने की सलाह दी जाती है ताकि लंबा उपवास सहज रूप से निभाया जा सके।

निर्जला उपवास और पारण की विधि

अष्टमी तिथि पर ब्रह्म मुहूर्त में ओठगन किया जाता है, जिसमें व्रती महिलाएं चूड़ा, दही, पानी या नारियल पानी ग्रहण कर सकती हैं। इसके बाद पूरा दिन निर्जला उपवास रखा जाता है। इस दौरान न अन्न लिया जाता है और न ही दातुन किया जाता है। माना जाता है कि यह नियम पालन करने से व्रत का फल अनेक गुना बढ़ता है।

नवमी तिथि पर, जो इस बार 15 सितंबर को सुबह 6 बजकर 35 मिनट पर आरंभ होगी, व्रत का पारण किया जाएगा। पूजा के बाद फल, नारियल और अकड़ी आदि को ढककर रखा जाता है। संतान से कपड़ा हटवाकर प्रसाद ग्रहण करने के पश्चात व्रत पूर्ण होता है। लोककथाओं के अनुसार, व्रत का पारण गाय के कच्चे दूध से करना शुभ माना जाता है।

जितिया व्रत में नहाय-खाय का क्या महत्व है?

नहाय-खाय व्रत की शुद्ध शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन व्रती स्नान कर विधि-विधान से पूजा करती हैं और सात्विक भोजन ग्रहण करके अगले दिन के निर्जला उपवास के लिए स्वयं को तैयार करती हैं।

व्रत के पारण की सही विधि क्या है?

पारण नवमी तिथि में पूजा कर फल, नारियल और अकड़ी को ढककर रखा जाता है। संतान से कपड़ा हटवाने के बाद प्रसाद ग्रहण करना और गाय के कच्चे दूध से पारण करना शुभ माना जाता है।

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Dhanarekha

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