… ताकि कोई बच्चा न करे संघर्षों का सामना
हैदराबाद। congress के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी से रोहित वेमुला एक्ट लागू करने का अनुरोध किया, जिसमें यह सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया गया कि भारत में कोई भी बच्चा डॉ बी.आर. अंबेडकर, रोहित वेमुला और अनगिनत अन्य लोगों द्वारा झेले गए संघर्षों का सामना न करे।
मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने जाति-आधारित भेदभाव का उल्लेख किया, जिसका सामना डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने अपने स्कूली वर्षों के दौरान किया था, जिसमें कहा गया था, ‘यह खेदजनक है कि आज भी दलित, आदिवासी और ओबीसी पृष्ठभूमि के लाखों छात्र हमारी शैक्षणिक प्रणाली में इस तरह के कठोर भेदभाव का सामना करते हैं।’
पीएचडी स्कॉलर रोहित वेमुला की आत्महत्या भेदभाव की प्रमुख प्रतीक : राहुल गांधी
17 जनवरी, 2016 को हैदराबाद विश्वविद्यालय के पीएचडी स्कॉलर रोहित वेमुला की दुखद आत्महत्या भारतीय उच्च शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव का एक प्रमुख प्रतीक बन गई। उस घटना के बाद से, कई समूह इस अधिनियम को लागू करने की वकालत कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करना है। राहुल गांधी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू से संपर्क किया है और उनसे कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से अपनी पिछली अपील के बाद कानून को आगे बढ़ाने में अगुवाई करने का आग्रह किया है।
कौन थे रोहित वेमुला?
हैदराबाद के छात्र रोहित वेमुला की मौत को आठ साल हो चुके हैं, उस एक घटना ने देश में बहस छेड़ दी थी- आखिर ये भेदभाव कब खत्म होगा, आखिर कॉलेजों में रैगिंग वाला सिस्टम कब पूरी तरह नष्ट होगा? अब जिस बहस ने पूरे देश को झकजोर दिया था, उसकी क्लोजर रिपोर्ट तेलंगाना की पुलिस ने कुछ दिन पहले दायर की। उस रिपोर्ट में जो भी कहा गया उसने पूरे मामले को ही पलट कर रख दिया और ये केस फिर चर्चा का विषय बन गया।