Arctic: आर्कटिक में चीन की बढ़ती मौजूदगी से चिंतित अमेरिका

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बर्फीले इलाकों में बढ़ी भू-रणनीतिक हलचल

वॉशिंगटन: आर्कटिक(Arctic) में चीन की बढ़ती गतिविधियों ने अमेरिका की बेचैनी बढ़ा दी है। इस महीने की शुरुआत में पांच चीनी आइसब्रेकर और एक अनुसंधान पोत वहां पहुंचे, जिनकी सुरक्षा एक पनडुब्बी कर रही है। इस कदम के बाद अमेरिका ने तुरंत युद्धपोत और सैटेलाइट निगरानी शुरू कर दी। विशेषज्ञों का कहना है कि आर्कटिक में चीन की मौजूदगी भू-राजनीतिक तनाव का संकेत है

चीन का वैज्ञानिक बेड़ा और उसकी ताकत

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान की अगुवाई जू लॉन्ग-2(Xue Long-2) आइसब्रेकर कर रहा है, जो नई पीढ़ी का सबसे शक्तिशाली पोलर रिसर्च जहाज माना जाता है। इसके साथ शेनहाई यिहाओ अनुसंधान पोत भी है, जो डीप-सी सबमरीन जिदी से लैस है।

चीन का तानसुओ सानहाओ आइसब्रेकर और पुराना जहाज झोंगशान दाक्सुए जिदी भी इस बेड़े का हिस्सा हैं। ये सभी जहाज 5 से 7 अगस्त के बीच बेरिंग जलडमरूमध्य पार कर आर्कटिक महासागर में सक्रिय हुए। अमेरिका के मुताबिक, यह बेड़ा अलास्का(Alaska) के तट से सिर्फ 537 किमी दूर तक पहुंच गया था।

अमेरिकी निगरानी और सैन्य प्रतिक्रिया

अमेरिका ने इन गतिविधियों को देखते हुए तटरक्षक बल को निगरानी के लिए तैनात किया। 5 अगस्त को अमेरिकी बलों ने चीनी अनुसंधान पोतों का पता लगाया और तुरंत सी-130जे हरक्यूलिस विमान से हवाई निगरानी शुरू की।

अगले ही दिन अमेरिका ने एक युद्धपोत को भी मिशन पर भेजा। अमेरिकी तटरक्षक बल ने कहा कि उसने लंबी दूरी से ट्रैकिंग की, लेकिन किसी चीनी जहाज को रोका नहीं गया। फिर भी वह लगातार इन पर नजर बनाए हुए है।

आर्कटिक में वैश्विक शक्ति संतुलन

पिछले कुछ वर्षों में आर्कटिक(Arctic) को सामरिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाने लगा है। चीन और रूस ने इस क्षेत्र में सहयोग को मजबूत किया है। 2019 में दोनों देशों ने हार्बिन इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी में संयुक्त लैब बनाई थी, जो ध्रुवीय तकनीक पर केंद्रित है।

पिछले साल दोनों देशों के तटरक्षक बलों ने पहली बार आर्कटिक में संयुक्त गश्त भी की थी। विश्लेषकों के अनुसार, यह साझेदारी अमेरिका के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रही है और आर्कटिक को भविष्य का रणनीतिक टकराव केंद्र बना रही है।

आर्कटिक में चीन ने हाल ही में क्या कदम उठाया?

चीन ने पांच आइसब्रेकर और एक अनुसंधान जहाज आर्कटिक(Arctic) भेजे हैं। यह बेड़ा बेरिंग जलडमरूमध्य पार करके अलास्का के पास पहुंच गया था, जिससे अमेरिका सतर्क हो गया।

अमेरिका ने चीनी जहाजों पर कैसी प्रतिक्रिया दी?

अमेरिका ने तटरक्षक बल, सैटेलाइट और युद्धपोत तैनात कर निगरानी तेज की। उसने जहाजों को रोका नहीं, लेकिन लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर रखी।

आर्कटिक को लेकर चीन और रूस क्या कर रहे हैं?

दोनों देशों ने 2019 में ध्रुवीय प्रौद्योगिकी पर संयुक्त लैब बनाई और पिछले साल पहली बार संयुक्त गश्त की। उनका सहयोग अमेरिका के लिए चिंता का विषय बन गया है।

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Dhanarekha

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