वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने बैंकिंग क्षेत्र के दिग्गज संस्थान जेपीमॉर्गन चेज़ और उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेमी डिमोन के खिलाफ एक बड़ा कानूनी मोर्चा खोल दिया है। ट्रंप ने फ्लोरिडा (Phlorida) की एक अदालत में बैंक के खिलाफ मुकदमा दायर करते हुए 5 अरब डॉलर (लगभग 41,500 करोड़ रुपये) के हर्जाने की मांग की है।
राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
ट्रंप का आरोप है कि बैंक ने साल 2021 में राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से उनके और उनकी कंपनियों के बैंक खाते बंद कर दिए थे। यह कानूनी कार्रवाई ट्रंप द्वारा अपने विरोधियों और आलोचकों के खिलाफ शुरू की गई मुकदमों की श्रृंखला का ताजा हिस्सा मानी जा रही है।
2021 में बंद किए गए खाते
मुकदमे के विवरण के अनुसार, फरवरी 2021 में जेपीमॉर्गन ने ट्रंप और उनके व्यवसायों को सूचित किया था कि उनके सभी वेल्थ मैनेजमेंट (Wealth Management) और व्यावसायिक खाते बंद किए जा रहे हैं। इसके लिए बैंक ने 60 दिनों का नोटिस दिया था।
‘ब्लैकलिस्ट’ करने का दावा
ट्रंप का दावा है कि उन्हें और उनके परिवार को पूरी तरह से ‘ब्लैकलिस्ट’ कर दिया गया था, जिसकी अनुमति स्वयं जेमी डिमोन ने दी थी। ट्रंप का तर्क है कि इस कार्रवाई के कारण अन्य वित्तीय संस्थानों ने भी उनके साथ कारोबार करने से दूरी बना ली, जिससे उन्हें भारी व्यावसायिक नुकसान उठाना पड़ा।
डिमोन से संपर्क का जिक्र
मुकदमे में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्रंप ने इस विषय पर सीधे जेमी डिमोन से संपर्क किया था। डिमोन ने समाधान का भरोसा तो दिया, लेकिन बाद में कोई संवाद नहीं किया।
दावोस विवाद और बढ़ा तनाव
यह मुकदमा ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन और प्रमुख वित्तीय संस्थानों के बीच तनाव चरम पर है। हाल ही में जेमी डिमोन ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में ट्रंप के उस प्रस्ताव की आलोचना की थी, जिसमें क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों पर 10 प्रतिशत की सीमा लगाने की बात कही गई थी। डिमोन ने इसे “आर्थिक आपदा” करार दिया था।
जेपीमॉर्गन ने आरोप किए खारिज
दूसरी ओर, जेपीमॉर्गन चेज़ ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बैंक की प्रवक्ता ट्रिश वेक्सलर ने एक आधिकारिक बयान में मुकदमे को पूरी तरह से निराधार बताया और कहा कि बैंक अदालत में मजबूती से अपना बचाव करेगा।
नियामकीय जोखिम का हवाला
बैंक का स्पष्ट कहना है कि वे राजनीतिक या धार्मिक आधार पर कभी भी खाते बंद नहीं करते हैं। बैंक के अनुसार, खाते बंद करने का निर्णय केवल तब लिया जाता है जब कोई ग्राहक संस्थान के लिए ‘नियामकीय जोखिम’ पैदा करता है।
‘डी-बैंकिंग’ पर ट्रंप का रुख
गौरतलब है कि ट्रंप लंबे समय से बड़े बैंकों पर रूढ़िवादी विचारधारा वाले लोगों को निशाना बनाने या ‘डी-बैंकिंग’ करने का आरोप लगाते रहे हैं। अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही उन्होंने कई बैंक प्रमुखों को चेतावनी दी थी कि राजनीतिक विचारों के आधार पर सेवाएं बंद करना नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है।
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कानूनी लड़ाई बनी नया टकराव बिंदु
फिलहाल, जेपीमॉर्गन के खिलाफ यह कानूनी लड़ाई अमेरिकी कॉर्पोरेट और राजनीतिक जगत के बीच बढ़ते टकराव का एक नया केंद्र बन गई है।
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