बर्लिन। राइनमेटाल एजी और एमबीडीए जर्मनी (MBDA Germany) ने मिलकर एक मॉड्यूलर फ्लोटिंग हाई-एनर्जी लेजर वेपन सिस्टम विकसित किया है जो हवा में उड़ते ड्रोन और छोटी मिसाइलें सेकंडों में बेअसर कर देता है। यह प्रणाली कंटेनर-आधारित है और जहाज के डेक या ज़मीन पर आसानी से लगाई जा सकती है।
सिस्टम का ढांचा और परीक्षण
नया सिस्टम मॉड्यूलर है — लेजर स्रोत, बीम-गाइडेंस और टारगेट-ट्रैकिंग अलग-अलग यूनिटों में आता है। जर्मन नेवी के फ्रिगेट FGS F219 पर समुद्र में 100 से ज्यादा टेस्ट-फायरिंग की जा चुकी हैं, जिनमें हाई-स्पीड ड्रोन (High Speed Drone) को सेकंडों में नष्ट कर देने की क्षमता का प्रदर्शन हुआ। यह लक्ष्यों पर फोकस कर सतह की गर्मी बढ़ाकर उन्हें क्षतिग्रस्त कर देता है — बिना विस्फोट या तेज आवाज के।
किसके हिस्से क्या आया
एमबीडीए ने टारगेट ट्रैकिंग (Target Tracking) और नेवी कमांड इंटीग्रेशन संभाला, जबकि राइनमेटाल ने बीम-गाइडेंस और लेजर-सोर्स टेक्नोलॉजी तैयार की। प्रोजेक्ट पर काम 2019 से चल रहा है और सिस्टम जर्मन फेडरल डिफेंस टेक्नोलॉजी एंड प्रोक्योरमेंट ऑफिस को सौंपा जा चुका है।
आर्थिक और परिचालन लाभ
लेजर शॉट्स पर पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में लागत बहुत कम बताई जा रही है — बारूद या ईंधन की जरूरत नहीं, रखरखाव आसान और फायरिंग तात्कालिक। कंपनी और सैन्य सूत्रों का दावा है कि हर शॉट की वास्तविक लागत नगण्य है, जिससे बड़े पैमाने पर आपूर्ति और लगातार उपयोग सम्भव हो जाएगा।
समयरेखा और भविष्य के विकास
परीक्षण जारी हैं और योजना है कि 2029 तक यह सिस्टम जर्मन नेवी में पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाए। भविष्य के अपग्रेड में सुपरसोनिक मिसाइलें, रॉकेट और बड़े कैलिबर के गोले नष्ट करने की क्षमता जोड़ी जा सकती है।
रणनीतिक और नैतिक असर
लेजर हथियारों के आने से युद्ध का स्वरूप बदल सकता है — विशेषकर ड्रोन-स्वॉर्म्स और छोटे हमलावर जहाज़ों के खिलाफ यह बेहद प्रभावी उपकरण साबित हो सकता है। दूसरी ओर, इससे लागत-आधारित युद्ध की नई गहराइयाँ और हथियारकरण की दौड़ भी तेज होने की आशंका है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद शांतिवादी छवि वाला जर्मनी अब अपनी रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बना रहा है; 2024 में उसके रक्षा खर्च का ज़िक्र करते हुए यह बताया गया कि वह दुनिया के बड़े रक्षा खर्चीले देशों में शामिल है।
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