हिंसा में 7 की मौत, ट्रम्प ने दी सैन्य हस्तक्षेप की चेतावनी
तेहरान: ईरान(Iran) में महंगाई और कट्टरपंथी शासन के खिलाफ शुरू हुआ जन-आक्रोश अब शिया धर्मगुरुओं के गढ़ कहे जाने वाले पवित्र शहर ‘कोम’ तक पहुँच गया है। पिछले छह दिनों से जारी इन प्रदर्शनों में अब तक 7 लोगों (6 प्रदर्शनकारी और 1 सुरक्षाकर्मी) की मौत हो चुकी है। भारी सुरक्षा के बावजूद, बड़ी संख्या में युवा (GenZ) और व्यापारी सड़कों पर उतरकर सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ और राजशाही की वापसी के समर्थन में नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मौलानाओं का शासन खत्म हो और निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी को सत्ता सौंपी जाए।
आर्थिक बदहाली और रियाल की गिरावट बनी मुख्य कारण
इस विद्रोह की सबसे बड़ी वजह ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था(Economy) है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ अपने अब तक के सबसे निचले स्तर (1.45 मिलियन प्रति डॉलर) पर पहुँच गई है। देश में खाद्य पदार्थों की कीमतों में 72% और दवाओं में 50% तक की भारी बढ़ोतरी हुई है। ऊपर से सरकार द्वारा 2026 के बजट में टैक्स को 62% बढ़ाने के प्रस्ताव(Iran) ने जलती आग में घी का काम किया है। लोग बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिससे उनका धैर्य जवाब दे गया है।
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ट्रम्प की चेतावनी और सरकार का विदेशी हस्तक्षेप का आरोप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया के जरिए ईरान को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या की गई, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा और सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है। दूसरी ओर, ईरान(Iran) के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने इन प्रदर्शनों को विदेशी ताकतों की साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि बाहरी शक्तियां देश में फूट डालने की कोशिश कर रही हैं। गौरतलब है कि ईरान 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ही मौलानाओं के शासन के अधीन है और वर्तमान सुप्रीम लीडर खामेनेई पिछले 37 वर्षों से सत्ता पर काबिज हैं।
ईरान में चल रहे इन प्रदर्शनों की शुरुआत कब और कहाँ से हुई थी?
इन प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को राजधानी तेहरान(Iran) से हुई थी, जब बढ़ती महंगाई से तंग आकर स्थानीय व्यापारियों ने बाजार बंद कर विरोध शुरू किया था।
प्रदर्शनकारी ईरान में किस तरह के बदलाव की मांग कर रहे हैं?
प्रदर्शनकारी वर्तमान कट्टरपंथी इस्लामिक शासन (सर्वोच्च नेता खामेनेई) को हटाने और 1979 से पहले की राजशाही को वापस लाने की मांग कर रहे हैं, जिसमें वे क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी को सत्ता सौंपने के नारे लगा रहे हैं।
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