खर्ग द्वीप पर कब्जे की तैयारी?
वॉशिंगटन/तेहरान: सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि अमेरिका ने अपने अत्याधुनिक युद्धपोत(Iran War) USS त्रिपोली को मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) की ओर रवाना कर दिया है। वर्तमान में यह युद्धपोत दक्षिणी हिंद महासागर में मौजूद है और अगले हफ्ते तक ईरान के करीब पहुंच सकता है। इस विशालकाय युद्धपोत पर अमेरिका की 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट (MEU) के 2,200 घातक कमांडो सवार हैं। ये सैनिक एम्फीबियस ऑपरेशन (जहाज से जमीन पर हमला), छापेमारी और हवाई हमलों में माहिर हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन पर गोपनीयता बनाए रखी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध अब एक विनाशकारी चरण में प्रवेश करने वाला है।
रणनीतिक लक्ष्य: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ और खर्ग द्वीप
अमेरिकी सेना के इस कदम के पीछे दो मुख्य उद्देश्य हैं। पहला, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खुलवाना, जिसे ईरान ने 28 फरवरी से बंद कर रखा है। दुनिया का 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है, जिसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है। दूसरा संभावित(Iran War) लक्ष्य खर्ग द्वीप है। यह द्वीप ईरान के लिए ‘लाइफलाइन’ है क्योंकि वह अपने 90% तेल का निर्यात(Export) यहीं से करता है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप का मकसद इस द्वीप को तबाह करना नहीं, बल्कि इस पर कब्जा करना हो सकता है ताकि इसे सौदेबाजी के लिए इस्तेमाल किया जा सके और तेल की सप्लाई सुरक्षित की जा सके।
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परमाणु खतरा: 450 किलो यूरेनियम को सुरक्षित करने की चुनौती
अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चिंता ईरान का 450 किलो संवर्धित यूरेनियम है। माना जा रहा है कि यह यूरेनियम उन ठिकानों के मलबे के नीचे दबा है जिन्हें हालिया हमलों में निशाना बनाया गया था। डोनाल्ड ट्रंप इस यूरेनियम को जब्त करने या नष्ट करने के लिए जमीनी सेना(Iran War) उतारने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। USS त्रिपोली पर तैनात F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट और MV-22 ऑस्प्रे ट्रांसपोर्ट हेलीकॉप्टर इस बेहद जोखिम भरे ऑपरेशन में मरीन कमांडो की मदद करेंगे। ट्रंप का स्पष्ट संदेश है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
USS त्रिपोली की खासियत क्या है और यह अन्य जहाजों से अलग कैसे है?
USS त्रिपोली एक ‘एम्फीबियस असॉल्ट’ जहाज है। यह एक तैरते हुए एयरबेस की तरह काम करता है, जिस पर F-35B स्टेल्थ जेट और भारी ट्रांसपोर्ट हेलीकॉप्टर तैनात रह सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी शक्ति इस पर सवार 2,200 मरीन कमांडो हैं, जिन्हें समुद्र के रास्ते किसी भी देश के तट पर उतरकर कब्जा करने या छापा मारने की विशेष ट्रेनिंग मिली होती है।
खर्ग द्वीप को ईरान की ‘लाइफलाइन’ क्यों कहा जाता है?
खर्ग द्वीप ईरान का मुख्य तेल टर्मिनल है। ईरान का लगभग 90% कच्चा तेल यहीं से लोड होकर दुनिया भर में जाता है। अगर अमेरिका इस द्वीप पर कब्जा कर लेता है या इसे ब्लॉक कर देता है, तो ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी और वह युद्ध लड़ने की क्षमता खो देगा।
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