बैंकॉक । थाईलैंड की राजनीति के सबसे चर्चित और प्रभावशाली नेताओं में शामिल पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनवात्रा (Former Prime Minister Thaksin Shinawatra) को रविवार को पैरोल पर रिहा कर दिया गया। भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के मामले में सजा काट रहे 76 वर्षीय थाकसिन करीब आठ महीने जेल में रहने के बाद बैंकॉक की क्लोंग प्रेम सेंट्रल जेल से बाहर आए। उनकी रिहाई के बाद समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
जेल के बाहर जुटे सैकड़ों समर्थक
थाकसिन की रिहाई के दौरान जेल परिसर के बाहर भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। करीब 300 समर्थक और राजनीतिक सहयोगी वहां मौजूद रहे। समर्थकों ने “वी लव थाकसिन () के नारे लगाए और लाल गुलाब देकर उनका स्वागत किया। सफेद पोलो टी-शर्ट और नीली पैंट पहने थाकसिन सीधे अपने परिवार के साथ रवाना हो गए और मीडिया से कोई बातचीत नहीं की।
2006 में सैन्य तख्तापलट में गई थी सत्ता
दूरसंचार क्षेत्र के अरबपति कारोबारी रहे थाकसिन शिनवात्रा वर्ष 2001 में थाईलैंड के प्रधानमंत्री बने थे। हालांकि 2006 में सैन्य तख्तापलट के बाद उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक विदेश में निर्वासन का जीवन बिताया। करीब 15 साल बाद वे 2023 में स्वदेश लौटे थे।
सजा घटाकर एक साल की गई
स्वदेश लौटने के बाद थाकसिन को भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के मामलों में आठ साल की सजा सुनाई गई थी। बाद में थाईलैंड के राजा महा वजिरालोंगकोर्न ने उनकी सजा घटाकर एक साल कर दी। न्याय मंत्रालय की समिति ने बढ़ती उम्र, खराब स्वास्थ्य और अच्छे आचरण को देखते हुए उन्हें पैरोल देने की सिफारिश की थी।
चार महीने तक रहेगी कड़ी निगरानी
रिहाई के बावजूद थाकसिन को अगले चार महीनों तक कड़ी निगरानी में रहना होगा। उन्हें बैंकॉक स्थित अपने आवास पर रहने, इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग ब्रेसलेट पहनने और नियमित रूप से अधिकारियों को रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
बेटी भी रह चुकी हैं प्रधानमंत्री
थाकसिन की बेटी पैतोंगटार्न शिनवात्रा 2024 में थाईलैंड की सबसे युवा प्रधानमंत्री बनी थीं। हालांकि हाल ही में एक विवादित फोन कॉल मामले के बाद संवैधानिक अदालत ने उन्हें पद से हटा दिया था। ऐसे समय में थाकसिन की रिहाई को थाई राजनीति में बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
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समर्थकों को फिर मजबूत वापसी की उम्मीद
थाकसिन की रिहाई से उनकी पार्टी फेउ थाई के समर्थकों में नई उम्मीद जगी है। माना जा रहा है कि उनकी वापसी से पार्टी को राजनीतिक मजबूती मिल सकती है और थाईलैंड की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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