Latest Hindi News : अब डायबिटीज और मोटापे से जूझ रहे लोगों को नहीं मिलेगा अमेरिकी वीजा

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डायबिटीज
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वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति आए दिन खबरों में बने रहते हैं — कभी टैरिफ तो कभी वीजा नीतियों को लेकर। अब ट्रंप प्रशासन (Trump Administration) ने एक नया आदेश जारी किया है, जिसके तहत स्वास्थ्य कारणों के आधार पर विदेशी नागरिकों को अमेरिका में प्रवेश या रहने का वीजा अस्वीकार किया जा सकता है।

गंभीर बीमारियों को माना जाएगा “पब्लिक चार्ज”

इस आदेश में कहा गया है कि डायबिटीज (Diabeties) मोटापा या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित आवेदक को “पब्लिक चार्ज” यानी सार्वजनिक संसाधनों पर बोझ माना जाएगा, जिससे उसका वीजा रोका जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक स्टेट डिपार्टमेंट ने यह दिशा-निर्देश सभी अमेरिकी दूतावासों और कांसुलेट्स को भेज दिए हैं।

वीजा अधिकारी करेंगे स्वास्थ्य जोखिम का आकलन

अब वीजा अधिकारी यह तय करेंगे कि कोई आवेदक भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं या सरकारी मदद पर निर्भर होगा या नहीं। पहले से आवेदकों को स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण का रिकॉर्ड देना होता था, लेकिन अब मेडिकल स्थितियों की सूची और विस्तृत कर दी गई है।

किन बीमारियों को शामिल किया गया है

नए नियमों में कहा गया है कि हृदय रोग, श्वसन संबंधी बीमारी, कैंसर, डायबिटीज, मेटाबॉलिक विकार, न्यूरोलॉजिकल (Neurological) समस्याएं और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियां लंबे और महंगे इलाज की मांग कर सकती हैं। इसलिए इन्हें अब वीजा मूल्यांकन प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाएगा।

वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा है जोखिम

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया की करीब 10% आबादी डायबिटीज से प्रभावित है, जबकि हृदय रोग अब भी वैश्विक स्तर पर मौत का प्रमुख कारण हैं। वहीं मोटापा भी अस्थमा, स्लीप एपनिया और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ा रहा है।

वीजा से पहले होगी आर्थिक क्षमता की जांच

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वीजा देने से पहले यह आकलन करना जरूरी है कि आवेदक स्वास्थ्य खर्चों का बोझ खुद उठा सकता है या नहीं। सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि आवेदकों की वित्तीय स्थिति जांचते समय यह देखा जाएगा कि क्या वे अपने चिकित्सा खर्च बिना सरकारी मदद के पूरा कर सकते हैं या नहीं।

कानूनी विशेषज्ञों ने जताई आपत्ति

इस दिशा-निर्देश पर कानूनी विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई है। वरिष्ठ वकीलों का कहना है कि यह नीति मौजूदा विदेशी मामलों की मैनुअल के विपरीत है। उनका तर्क है कि वीजा अधिकारी चिकित्सा विशेषज्ञ नहीं होते, इसलिए उन्हें भविष्य के संभावित मेडिकल खर्च का अनुमान लगाने का अधिकार देना अनुचित है।

स्थायी निवास के आवेदनों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

नए नियमों का प्रभाव मुख्य रूप से स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) के आवेदनों पर पड़ेगा। अधिकारियों को अब आवेदक के परिवार या आश्रितों की सेहत को भी जांचना होगा, ताकि यह तय हो सके कि उनकी देखभाल से आवेदक की आर्थिक स्थिति प्रभावित तो नहीं होगी। फिलहाल सभी वीजा आवेदकों के लिए मेडिकल जांच, टीबी टेस्ट और टीकाकरण प्रमाणपत्र देना अनिवार्य कर दिया गया है।

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Anuj Kumar

लेखक परिचय

Anuj Kumar

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