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Shahbaz Sharif: विवादों में शहबाज शरीफ

Dhanarekha
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Shahbaz Sharif: विवादों में शहबाज शरीफ

गाजा पीस बोर्ड पर हस्ताक्षर और पाकिस्तान में राजनीतिक उबाल

इस्लामाबाद: दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री(Shahbaz Sharif) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के चार्टर पर हस्ताक्षर किए। इस फैसले ने पाकिस्तान के घरेलू राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है, जहाँ विपक्ष इसे ट्रम्प के सामने “समर्पण” और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बता रहा है

विपक्ष का आरोप: “अमीरों का क्लब” और संप्रभुता का सवाल

विपक्षी दलों और कई विशेषज्ञों, जिनमें लेखक जाहिद हुसैन भी शामिल हैं, ने इस कदम को “जल्दबाजी में लिया गया विनाशकारी फैसला” करार दिया है। विपक्ष का तर्क है कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) को दरकिनार कर एक समानांतर(Shahbaz Sharif) व्यवस्था बना रहा है, जो वैश्विक संतुलन के लिए खतरा है। आलोचकों ने इसे “अमीरों का क्लब” बताया है, क्योंकि बोर्ड में शामिल होने के लिए 1 अरब डॉलर (करीब 8400 करोड़ रुपये) के योगदान की शर्त रखी गई है। विपक्ष ने सवाल उठाया है कि क्या पाकिस्तान की नाजुक अर्थव्यवस्था इतने भारी बोझ को उठाने के लिए तैयार है?

फिलिस्तीन का मुद्दा और पाकिस्तान की विश्वसनीयता

पाकिस्तानी संसद में विपक्षी नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास और पीटीआई(Shahbaz Sharif) के नेताओं ने इस बोर्ड की सदस्यता को नैतिक रूप से गलत बताया है। उनका मुख्य आरोप यह है कि इस बोर्ड में इजराइल और अब्राहम समझौते के समर्थक देश तो शामिल हैं, लेकिन इसमें फिलिस्तीनियों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। आलोचकों के अनुसार, पाकिस्तान जो हमेशा कश्मीर मुद्दे पर UN के प्रस्तावों की दुहाई देता है, अब एक ऐसे संगठन का हिस्सा बन रहा है जो खुद UN के ढांचे को कमजोर कर सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

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ट्रम्प की ‘गुड बुक्स’ में रहने की कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि शहबाज(Shahbaz Sharif) सरकार का यह कदम आर्थिक मदद और अमेरिकी समर्थन की तलाश में ट्रम्प की नीतियों के करीब आने की एक कोशिश है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रम्प इस बोर्ड के माध्यम से गाजा में एक इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) तैनात करना चाहते हैं, जिसमें पाकिस्तान की अनुभवी सैन्य शक्ति की अहम भूमिका हो सकती है। हालांकि, डरावनी आशंका यह है कि अगर पाकिस्तानी सैनिकों को गाजा में तैनात किया गया, तो उन्हें वहां के स्थानीय प्रतिरोध से लड़ना पड़ सकता है, जो पाकिस्तान के लिए एक नई कूटनीतिक मुसीबत बन सकता है।

‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए सदस्य देशों के लिए क्या वित्तीय शर्तें रखी गई हैं?

बोर्ड ऑफ पीस के ड्राफ्ट चार्टर के अनुसार, जो देश इस बोर्ड का 3 साल से अधिक समय तक स्थायी सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा। हालांकि, शुरुआती 3 साल की सदस्यता के लिए इस योगदान को अनिवार्य नहीं रखा गया है, लेकिन इसे भविष्य में एक बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी माना जा रहा है।

विपक्ष के अनुसार, इस बोर्ड में शामिल होने से संयुक्त राष्ट्र (UN) की भूमिका कैसे प्रभावित होगी?

विपक्ष का आरोप है कि डोनाल्ड ट्रम्प इस बोर्ड के जरिए एक ऐसी नई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बना रहे हैं जो UN की वैश्विक भूमिका को सीमित कर देगी। चूंकि बोर्ड के पास वीटो और फैसले लेने की असीमित शक्तियां (खासकर अध्यक्ष के रूप में ट्रम्प के पास) होंगी, इसलिए यह मौजूदा बहुपक्षीय कूटनीतिक सिस्टम (UNSC) को हाशिए पर धकेल सकता है।

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