सैन्य और आर्थिक दबाव: सत्ता परिवर्तन का नया हथियार
वाशिंगटन: अब केवल कूटनीति तक सीमित(Trump) नहीं है, बल्कि वह वेनेजुएला जैसे देशों में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने के लिए खुले तौर पर युद्धपोतों (Warships) की तैनाती कर रहा है। लैटिन अमेरिका में प्रभाव जमाने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने आर्थिक प्रतिबंधों को एक हथियार बना लिया है, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण ब्राजील पर लगाया गया 50% टैरिफ है। यह न केवल उस देश की अर्थव्यवस्था(Economy) को चोट पहुँचाता है, बल्कि वहां की न्यायपालिका और सरकार को अमेरिकी हितों के अनुसार झुकने पर मजबूर करने की एक सीधी कोशिश है।
चुनावों में हस्तक्षेप और पसंदीदा नेताओं का समर्थन
होंडुरास और अर्जेंटीना जैसे देशों के हालिया चुनाव अमेरिका की ‘पिक एंड चूज’ नीति का उदाहरण हैं। होंडुरास में आर्थिक मदद रोकने की धमकी देकर अपने पसंदीदा उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करना और अर्जेंटीना में जेवियर मिलेई के पक्ष में माहौल बनाना यह दर्शाता है कि अब वाशिंगटन(Trump) तय कर रहा है कि किस देश की सत्ता किसके हाथ में होगी। विपक्षी नेताओं को सजा से माफी देना या विरोधियों पर पाबंदियां लगाना अब अमेरिकी विदेश नीति का हिस्सा बन चुका है, जिससे लोकतंत्र की परिभाषा प्रभावित हो रही है।
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म्यांमार में महाशक्तियों की जंग: अमेरिका बनाम चीन
म्यांमार आज अमेरिका और चीन के बीच ‘प्रॉक्सि वॉर’ का केंद्र बन गया है। जहाँ चीन अपने आर्थिक गलियारे (बंदरगाह और पाइपलाइन) की सुरक्षा के लिए वहां के सैन्य शासन को वैध बनाने में जुटा है, वहीं अमेरिका अपने प्रभाव वाली लोकतांत्रिक ताकतों को वापस(Trump) लाने की कोशिश कर रहा है। 28 दिसंबर के चुनावों को लेकर वैश्विक स्तर पर उठ रहे सवाल यह बताते हैं कि म्यांमार की जनता की राय से ज्यादा महत्वपूर्ण अब वहां हिंद महासागर पर नियंत्रण और रणनीतिक बढ़त हासिल करना हो गया है।
अमेरिका ने ब्राजील पर 50% का भारी-भरकम टैरिफ क्यों लगाया और इसका संदेश क्या था?
अमेरिका ने यह कदम ब्राजील के मौजूदा राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा की सरकार पर दबाव बनाने और अपने करीबी पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो का समर्थन करने के लिए उठाया। इसका(Trump) स्पष्ट संदेश यह था कि यदि ब्राजील की सरकार या वहां की न्यायपालिका बोल्सोनारो जैसी अमेरिका समर्थक हस्तियों पर कोई कार्रवाई करती है, तो उसे गंभीर आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ेगा।
म्यांमार के चुनावों में चीन की गहरी रुचि के पीछे मुख्य रणनीतिक कारण क्या हैं?
चीन म्यांमार को हिंद महासागर तक सीधी पहुंच बनाने के एक गेटवे के रूप में देखता है। वहां चीन के कई बड़े प्रोजेक्ट्स जैसे तेल-गैस पाइपलाइन और बंदरगाह निर्माणाधीन हैं, जो गृहयुद्ध की वजह से रुके हुए हैं। इसलिए चीन वहां की सैन्य सरकार को समर्थन और चुनाव में तकनीकी मदद दे रहा है ताकि एक स्थिर शासन के जरिए उसके अरबों डॉलर के निवेश और रणनीतिक हित सुरक्षित रह सकें।
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