Trump बेनकाब! बाइडेन के समय US ही चाहता था India Russia से खरीदे तेल

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अमेरिका (US) और भारत (India) के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव से जुड़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए निशाना बनाया है और कड़े शुल्क लगाने की धमकी दी है। लेकिन एक चौंकाने वाला खुलासा यह है कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में अमेरिका ने ही भारत से रूसी तेल खरीदने की गुहार लगाई थी। यह दोहरी नीति भारत और अमेरिका के रिश्तों में नया तनाव पैदा कर रही है। आइए, इस मामले को विस्तार से समझते हैं


डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर भारत की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि भारत रूस से भारी मात्रा में सस्ता तेल खरीदकर इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे दामों पर बेच रहा है, जिससे उसे भारी मुनाफा हो रहा है। ट्रंप ने भारत पर यूक्रेन में रूसी युद्ध मशीन को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने 1 अगस्त से भारत के निर्यात पर 25% शुल्क और रूसी तेल खरीद के लिए अतिरिक्त “जुर्माना” लगाने की घोषणा की। ट्रंप ने कहा, “भारत को इस बात की परवाह नहीं कि यूक्रेन में रूसी युद्ध के कारण कितने लोग मारे जा रहे हैं।” लेकिन भारत ने इस आलोचना को सिरे से खारिज कर दिया है।


भारत सरकार ने ट्रंप के इन बयानों को “अनुचित और बेबुनियाद” करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और रूस का रिश्ता “स्थिर और समय-परीक्षित” है, और इसे किसी तीसरे देश के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। जायसवाल ने यह भी खुलासा किया कि 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद, जब यूरोपीय देशों ने रूसी तेल आयात बंद किया, तब अमेरिका ने ही भारत से रूसी तेल खरीदने को प्रोत्साहित किया था।

तत्कालीन अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने कहा था कि भारत का रूसी तेल खरीदना वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर करने के लिए जरूरी था। यह नीति तेल की कीमतों को 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से रोकने के लिए बनाई गई थी।


भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, और रूस उसका सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है। 2024 में भारत ने अपनी 70% तेल जरूरतें रूस से पूरी कीं। जनवरी-जून 2025 में रूस से तेल आयात 1.75 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा, जो पिछले साल की तुलना में 1% अधिक है। भारत का कहना है कि सस्ता रूसी तेल खरीदने से उसने वैश्विक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद की है। पूर्व भारतीय व्यापार अधिकारी अजय श्रीवास्तव ने कहा, “रूसी तेल ने भारत को आर्थिक स्थिरता दी, और ट्रंप का यह दबाव सिर्फ एक व्यापारिक रणनीति है।”


हालांकि, ट्रंप के दबाव के बाद कुछ खबरें आईं कि भारत की सरकारी रिफाइनरियों ने रूसी तेल खरीद अस्थायी रूप से रोकी है। लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया कि रूसी तेल के दीर्घकालिक अनुबंधों को रातोंरात खत्म करना संभव नहीं है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमारी रिफाइनरियां कीमत, गुणवत्ता और आर्थिक कारकों के आधार पर तेल खरीदती हैं।” भारत ने यह भी बताया कि उसने 2025 में अमेरिका से तेल आयात 51% बढ़ाया है, जो दर्शाता है कि वह अपनी ऊर्जा रणनीति में संतुलन बनाए रख रहा है।


ट्रंप की नीति को कई विशेषज्ञ अमेरिका की रूस पर दबाव बनाने की रणनीति मान रहे हैं। लेकिन भारत ने साफ किया कि वह अपनी आर्थिक और रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखेगा। क्या यह तनाव भारत-अमेरिका संबंधों को प्रभावित करेगा, या भारत अपनी ऊर्जा नीति पर अडिग रहेगा? इस सवाल का जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा। अधिक अपडेट्स के लिए बने रहें आज तक के साथ।

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लेखक परिचय

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