‘Wonderful dinner’ with Trump after Israeli attack: कतर के पीएम शेख मोहम्मद की टिप्पणी

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डिनर का आयोजन और पृष्ठभूमि

13 सितंबर 2025 को न्यूयॉर्क (New york) में कतर (Qatar) के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक निजी डिनर किया। यह डिनर इजरायल द्वारा दोहा में हमास नेताओं पर किए गए हालिया हमले के कुछ दिन बाद हुआ, जिसकी वैश्विक स्तर पर कड़ी निंदा हुई थी। हमला गाजा संघर्ष में अमेरिका की मध्यस्थता को प्रभावित करने वाली घटना के रूप में देखा गया

कतर, जो हमास का प्रमुख समर्थक और मध्यस्थ है, ने इस हमले को शांति प्रयासों पर हमला बताया। डिनर से पहले, अल-थानी ने व्हाइट हाउस में उपराष्ट्रपति जेडी वेन्स और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ लगभग एक घंटे की बैठक की। इसमें कतर की मध्यस्थता भूमिका, रक्षा सहयोग, गाजा में युद्धविराम, बंधक रिहाई और युद्धोत्तर पुनर्निर्माण योजना पर चर्चा हुई।

ट्रंप की प्रतिक्रिया

ट्रंप ने इजरायली हमले पर खुलकर नाराजगी जताई। उन्होंने इसे “एकतरफा हमला” करार दिया, जो न तो अमेरिकी हितों में है और न ही इजरायल के। ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की और असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कतर को आश्वासन दिया कि ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी। यह बयान अमेरिका की मध्य पूर्व नीति में बदलाव का संकेत देता है, जहां कतर को महत्वपूर्ण साझेदार माना जा रहा है। व्हाइट हाउस ने बैठक की पुष्टि की, लेकिन विस्तृत जानकारी नहीं दी।

डिनर के बाद पीएम की टिप्पणी

डिनर के बाद कतर के उप मिशन प्रमुख हमाह अल-मुफ्ताह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “शानदार डिनर…”। यह टिप्पणी डिनर की सकारात्मकता को दर्शाती है, जो तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद दोनों नेताओं के बीच संबंधों की मजबूती दिखाती है। अल-थानी ने पहले इजरायल पर शांति प्रयासों को नष्ट करने का आरोप लगाया था, लेकिन जोर दिया कि कतर मध्यस्थता से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा, “क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए हम प्रयास जारी रखेंगे।”

यह डिनर अक्टूबर 2023 से जारी इजरायल-गाजा संघर्ष के बीच महत्वपूर्ण है। इजरायली हमलों में 64,000 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, लगभग पूरी आबादी विस्थापित है, और लाखों लोग भुखमरी का शिकार हैं। कतर की भूमिका बंधकों की रिहाई और युद्धविराम वार्ता में अहम है। अमेरिका-कतर सहयोग से उम्मीद है कि शांति प्रक्रिया तेज होगी। यह घटना मध्य पूर्व में कूटनीति की नई दिशा का संकेत दे रही है।

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