नई दिल्ली । प्रीडायबिटीज से बाहर निकलने वाले मरीजों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जिन लोगों ने अपने ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Lavel) को दोबारा सामान्य स्तर पर ला लिया, उनमें हार्ट फेलियर, दिल की बीमारी से मौत या अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम करीब 60 प्रतिशत तक कम पाया गया है। यह दावा शोधकर्ताओं ने ताजा अध्ययन के आधार पर किया है।
हार्ट फेलियर और मौत का जोखिम 58 प्रतिशत तक घटा
अध्ययन के मुताबिक, जिन मरीजों ने प्रभावी रूप से प्रीडायबिटीज को रिवर्स कर लिया, उनमें कार्डियोवैस्कुलर कारणों से मौत या हार्ट फेलियर के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा 58 प्रतिशत तक कम हो गया।
दशकों तक बना रह सकता है सकारात्मक असर
यूके के किंग्स कॉलेज लंदन (Kings College London) के शोधकर्ताओं का कहना है कि ब्लड ग्लूकोज (Blood Glucose) को सामान्य स्तर पर लाने से मिलने वाला यह लाभ लंबे समय तक, यहां तक कि दशकों तक बना रह सकता है। इससे यह संकेत मिलता है कि शुरुआती चरण में ब्लड शुगर पर नियंत्रण हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद अहम है।
सिर्फ लाइफस्टाइल बदलाव से जरूरी नहीं घटे जोखिम
यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि हाल के कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि केवल जीवनशैली में बदलाव, जैसे नियमित व्यायाम, वजन कम करना और खानपान में सुधार, प्रीडायबिटीज वाले सभी लोगों में दिल की बीमारियों का जोखिम जरूरी नहीं कि कम कर दें।
प्रिवेंटिव मेडिसिन की धारणा को दी चुनौती
किंग्स कॉलेज लंदन और यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ट्यूबिंजन में डायबिटीज के रीडर और अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. एंड्रियास बिर्केनफेल्ड ने कहा कि यह शोध प्रिवेंटिव मेडिसिन से जुड़ी एक आम धारणा को चुनौती देता है।
ब्लड शुगर सामान्य होना ही असली फर्क
डॉ. बिर्केनफेल्ड के अनुसार, लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि वजन घटाने, व्यायाम और हेल्दी डाइट अपनाने से हार्ट अटैक और समय से पहले मौत का खतरा टल सकता है। हालांकि ये उपाय जरूरी हैं, लेकिन मौजूदा सबूत यह दिखाते हैं कि असल फायदा तब होता है, जब प्रीडायबिटीज पूरी तरह खत्म होकर ब्लड शुगर का स्तर दोबारा सामान्य हो जाता है।
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क्या है प्रीडायबिटीज
प्रीडायबिटीज वह स्थिति होती है, जिसमें ब्लड ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक होता है, लेकिन अभी इतना नहीं बढ़ता कि टाइप-2 डायबिटीज का निदान किया जा सके। यही वह चरण है, जहां समय रहते नियंत्रण से गंभीर बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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