नई दिल्ली। भारत और दक्षिण कोरिया (South Korea) के बीच संबंधों को नई दिशा देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और राष्ट्रपति ली जी-म्युंग की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक दोगुना कर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।
15 समझौते और 6 बड़ी घोषणाएं
बैठक के दौरान व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर (Semicondutor) और शिपबिल्डिंग जैसे क्षेत्रों में कुल 15 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा छह प्रमुख घोषणाएं भी की गईं, जो दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करेंगी।
‘चिप से शिप’ तक सहयोग
संयुक्त प्रेस बयान में पीएम मोदी ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया “विश्वास की भागीदारी” को “भविष्य की साझेदारी” में बदल रहे हैं। उन्होंने “चिप से लेकर शिप, टैलेंट से टेक्नोलॉजी और एनर्जी से एनवायरमेंट” तक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
व्यापार को 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 27 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। इसे 2030 तक 50 अरब डॉलर तक ले जाने के लिए कई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें फाइनेंशियल फोरम और औद्योगिक सहयोग समिति का गठन शामिल है।
उद्योग और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
भारत में दक्षिण कोरियाई कंपनियों, खासकर एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कोरियन इंडस्ट्रियल टाउनशिप स्थापित करने का फैसला लिया गया है। एआई, आईटी, स्टील, पोर्ट और शिपबिल्डिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग को प्राथमिकता दी जाएगी।
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सांस्कृतिक रिश्तों को भी मजबूती
पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच हजारों साल पुराने सांस्कृतिक संबंधों का जिक्र करते हुए अयोध्या की राजकुमारी सूरीरत्ना और कोरिया के राजा किम-सुरो की ऐतिहासिक कथा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज भारत में के-पॉप और के-ड्रामा लोकप्रिय हो रहे हैं, जबकि दक्षिण कोरिया में भारतीय संस्कृति का प्रभाव बढ़ रहा है।
फ्रेंडशिप फेस्टिवल की घोषणा
दोनों देशों ने सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए 2028 में “भारत-दक्षिण कोरिया फ्रेंडशिप फेस्टिवल” आयोजित करने की घोषणा की है। यह दौरा पिछले आठ वर्षों में किसी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की पहली भारत यात्रा है, जिसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
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