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UP-अयोध्या में बड़ा बदलाव, अब प्रथम तल पर ‘राम दरबार’ नहीं, ‘राम परिवार’ के होंगे दर्शन

Anuj Kumar
Anuj Kumar
UP-अयोध्या में बड़ा बदलाव, अब प्रथम तल पर ‘राम दरबार’ नहीं, ‘राम परिवार’ के होंगे दर्शन

अयोध्या। अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर (Shri Ram Janmabhoomi Temple) के प्रथम तल पर स्थापित होने वाले विग्रहों के सामूहिक स्वरूप को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि अब राम दरबार के स्थान पर इसे राम परिवार के नाम से जाना जाएगा।

भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को प्राथमिकता

यह निर्णय भारतीय संस्कृति की जड़ों, भाषाई शुद्धता और सनातन परंपराओं के सम्मान को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। ट्रस्ट के अनुसार, दरबार शब्द की उत्पत्ति विदेशी मूल की है, जबकि राम मंदिर की संपूर्ण परिकल्पना और ढांचा पूर्णतः भारतीय लोक परंपराओं और सनातन मूल्यों पर आधारित है।

राजसी नहीं, आदर्श पारिवारिक स्वरूप की भावना

इस नाम परिवर्तन के पीछे मुख्य उद्देश्य भगवान श्रीराम (Sriram) को एक शासक या राजसी औपचारिक स्वरूप के बजाय एक आदर्श पारिवारिक केंद्र के रूप में प्रस्तुत करना है। ट्रस्ट के पास इस नाम को बदलने के कई सुझाव आए थे, जिन पर प्रख्यात संतों और विद्वानों से विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

राम परिवार नाम से भावनात्मक जुड़ाव

राम परिवार नाम न केवल भगवान राम, माता सीता, तीनों भाइयों—लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न—और परम भक्त हनुमान के बीच के अटूट और भावनात्मक संबंधों को दर्शाता है, बल्कि यह आम जनमानस के हृदय से भी सीधा जुड़ाव महसूस कराता है।

प्रथम तल पर पूरे परिवार की मूर्तियाँ होंगी विराजमान

प्रथम तल पर स्थापित किए जाने वाले इस समूह में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम (Purushotam Sri ram) के साथ उनके पूरे परिवार की मूर्तियाँ विराजमान होंगी। संत समाज ने भी इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा है कि राम परिवार शब्द में जो आत्मीयता और लोकनायक का भाव है, वह किसी भी शासकीय या औपचारिक शब्द में नहीं मिल सकता।

भविष्य की पीढ़ियों को रामराज्य से जोड़ने की पहल

यह बदलाव भविष्य की पीढ़ियों को रामराज्य की उस संकल्पना से जोड़ेगा, जहाँ परिवार और समाज के बीच समरसता का अटूट बंधन था

अयोध्या के राम मंदिर का इतिहास क्या है?

अयोध्या राम मंदिर का इतिहास सदियों पुराने विवाद, संघर्ष और आस्था से जुड़ा है, जो भगवान राम के जन्मस्थान पर एक मंदिर और बाबरी मस्जिद के निर्माण से शुरू होकर, 1992 में मस्जिद विध्वंस, और अंततः 2019 के सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद भव्य मंदिर के निर्माण और 2024 में प्राण-प्रतिष्ठा तक चला, जिसे ‘राम जन्मभूमि आंदोलन’ के नाम से जाना जाता है.  

राम की असली कहानी क्या है?

भगवान विष्णु के अवतार के रूप में उनके जन्म, मर्यादा पालन (वचन, कर्तव्य, पिता की आज्ञा), 14 साल के वनवास, पत्नी सीता के रावण द्वारा हरण, हनुमान और वानर सेना की मदद से लंका पर विजय, रावण के वध और उसके बाद के जीवन के संघर्षों को दर्शाती है, जो धर्म, नैतिकता और आदर्शों का प्रतीक है। 

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