नई दिल्ली । हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing) एक उन्नत तकनीक है, जो सैकड़ों प्रकाश बैंड्स के जरिए धरती की सतह की बेहद सटीक पहचान करती है। इसरो का ईओएस-एन1 ‘अन्वेषा’ सैटेलाइट, जिसे डीआरडीओ ने तैयार किया है, भारत को रक्षा, आपदा प्रबंधन, खेती और पर्यावरण निगरानी में बड़ी मजबूती देगा।
पीएसएलवी-सी62 मिशन से होगी लॉन्चिंग
यह तकनीक रणनीतिक योजना के साथ-साथ आम जनजीवन से जुड़े क्षेत्रों में भी अहम भूमिका निभाएगी। इसरो पीएसएलवी-सी62 मिशन के जरिए ईओएस-एन1 ‘अन्वेषा’ सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है।
पारंपरिक सैटेलाइट से कैसे अलग है हाइपरस्पेक्ट्रल तकनीक
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पारंपरिक सैटेलाइट सीमित रंगों के आधार पर धरती की तस्वीरें लेते हैं, जबकि हाइपरस्पेक्ट्रल तकनीक सैकड़ों बेहद संकरे प्रकाश बैंड्स को रिकॉर्ड करती है। ये बैंड्स दृश्य प्रकाश से लेकर इंफ्रारेड तक फैले होते हैं, जिससे हर वस्तु की एक विशिष्ट ‘लाइट फिंगरप्रिंट’ तैयार होती है।
हर वस्तु की अलग पहचान करता है डेटा
धरती पर मौजूद हर वस्तु—मिट्टी, पानी, वनस्पति या मानव निर्मित ढांचे—रोशनी के साथ अलग-अलग व्यवहार करती है। इन विशेष पैटर्न्स को वैज्ञानिक स्पेक्ट्रल लाइब्रेरी से मिलाते हैं, जिसे जमीन पर स्पेक्ट्रोरैडियोमीटर जैसे उपकरणों से तैयार किया जाता है। इसके बाद इस डेटा को जीआईएस और 3डी मैपिंग सिस्टम के साथ जोड़कर विस्तृत विश्लेषण किया जाता है।
रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त
हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक योजना बनाने में अहम भूमिका निभाती है। यह जमीन के प्रकार की पहचान कर सैन्य वाहनों और सैनिकों के लिए सुरक्षित मार्ग तय करने में मदद करती है। साथ ही यह नकली कैमोफ्लाज, छिपे हथियारों और संदिग्ध गतिविधियों का भी पता लगाने में सक्षम है।
खेती, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण में भी उपयोगी
यह तकनीक केवल सैन्य उद्देश्यों तक सीमित नहीं है। खेती में फसलों की सेहत की निगरानी, आपदाओं के दौरान प्रभावित इलाकों की त्वरित पहचान, राहत एवं बचाव कार्यों और जलवायु परिवर्तन के अध्ययन में भी हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा बेहद उपयोगी साबित हो रहा है।
12 जनवरी का लॉन्च बनेगा अहम पड़ाव
12 जनवरी को प्रस्तावित अन्वेषा सैटेलाइट का प्रक्षेपण भारत की रणनीतिक क्षमता को और मजबूत करेगा। इसके साथ ही यह आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और त्वरित निर्णय प्रणाली को नई गति देगा।
अंतरिक्ष तकनीक अब जनहित की दिशा में
यह मिशन दर्शाता है कि भारत की अंतरिक्ष तकनीक अब केवल रक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश और समाज के व्यापक हित में काम कर रही है। यह लॉन्च भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।
Read More :