नई दिल्ली। जो काम पाकिस्तान सालों से नहीं कर पाया वही खेल अब एर्दोगन का तुर्की खेल रहा। लाल किले पर धमाके (Red Fort Blast) से लेकर भारत के अपाचे हेलीकॉप्टर (Apache Helicopter) की डिलीवरी रोकने तक सबूतों की डोर सीधे अंकारा तक जाती है।
अपाचे हेलीकॉप्टर डिलीवरी में तुर्की की रोक
बोइंग कंपनी के अपाचे हेलीकॉप्टर (Helicopter) से भारत ने इंडियन आर्मी की एविएशन विंग के लिए छह नए अपाचे ऑर्डर किए थे। तीन हेलीकॉप्टर जुलाई 2025 में आ चुके थे। लेकिन बाकी 3 नवंबर में आने थे और तभी हुआ खेल।
8 नवंबर को जो कार्गो एयरक्राफ्ट एन-124 भारत आने वाला था, वह अचानक वापस अमेरिका लौट गया। क्योंकि बीच रास्ते में तुर्की ने अपने एयरस्पेस की क्लीयरेंस को ही वापस ले लिया। इसे अननोन लॉजिस्टिक इशू कहा गया।
600 मिलियन डॉलर के सौदे की डिलीवरी पर असर
भारतीय सेना की एविएशन विंग के लिए 2020 में 600 मिलियन डॉलर के सौदे के तहत छह AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर मंगवाए गए थे। पहली खेप के तीन हेलीकॉप्टर जुलाई 2025 में सफलतापूर्वक डिलीवर होकर जोधपुर एयर बेस पर तैनात हैं। शेष तीन नवंबर 2025 तक भारत पहुंचने वाले थे, लेकिन 8 नवंबर को जो कार्गो विमान एन-124 भारत की ओर रवाना हुआ था, वह तुर्की की एयरस्पेस अनुमति वापस लेने के कारण अमेरिका लौट गया।
विमान की यात्रा और अड़चनें
रिपोर्ट के अनुसार, 30 अक्टूबर को यह भारी मालवाहक विमान जर्मनी के लाइपजिग से उड़ा और एरिजोना के मेसा गेटवे एयरपोर्ट पर उतरा, जहां बोइंग की अपाचे उत्पादन इकाई है।
1 नवंबर को यह इंग्लैंड के ईस्ट मिडलैंड्स एयरपोर्ट पहुंचा, जहां ईंधन भरने के बाद आठ दिनों तक रुका रहा। 8 नवंबर को भारत की बजाय यह फिर मेसा लौट आया। हेलीकॉप्टरों को उतारकर एफ-250 ट्रकों से अमेरिकी हवाई अड्डे तक ले जाया गया।
बोइंग की सफाई और स्रोतों के दावे
बोइंग ने इसे अज्ञात लॉजिस्टिक समस्या बताया, लेकिन स्रोतों का कहना है कि तुर्की का हवाई क्षेत्र बंद करना ही मुख्य बाधा था। पहली खेप अगस्त में इसी रूट से गुजरकर भारत पहुंची थी। अब बोइंग वैकल्पिक रूट पर काम कर रहा है, लेकिन यह देरी सेना की हवाई हमला क्षमता को प्रभावित कर रही है।
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