साइबर क्राइम (Cyber Crime) का नया बादशाह हर्षित मिश्रा उर्फ हर्षित कुमार सुर्खियों में है। दैनिक भास्कर और अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिहार के सुपौल जिले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने एक सनसनीखेज कार्रवाई में जदयू के युवा प्रदेश सचिव हर्षित कुमार को गिरफ्तार किया। हर्षित और उसके भाई ने चीनी हैकर्स के साथ मिलकर 10 हजार लोगों से 10 करोड़ रुपये की ठगी की। इस रकम को दुबई और मलेशिया में निवेश किया गया। हर्षित ने फर्जी सिम बॉक्स और 1500 सिम कार्ड्स का इस्तेमाल कर टेलीकॉम कंपनियों को भारी नुकसान पहुंचाया .
20 जुलाई 2025 को EOU की 19 घंटे की छापेमारी में सुपौल के करजाइन थाना क्षेत्र के गौसपुर गांव से हर्षित को हिरासत में लिया गया। उसके पास से 8 सिम बॉक्स, कई लैपटॉप, मोबाइल फोन, और संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए। जांच में पता चला कि हर्षित की संपत्ति 12-14 करोड़ रुपये की है, जिसमें मोतिहारी में एक आलीशान मकान और 30-35 बैंक खाते शामिल हैं। उसने क्रिप्टोकरेंसी के जरिए ठगी की रकम को छिपाने की कोशिश की। केंद्रीय दूरसंचार मंत्रालय के अनुसार, इस गिरोह ने टेलीकॉम सेक्टर को 60 करोड़ रुपये का चूना लगाया
EOU ने बताया कि हर्षित का नेटवर्क पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, गोवा, कर्नाटक, दिल्ली, ओडिशा और झारखंड तक फैला था। वह विदेशी हैंडलर्स के साथ मिलकर काम करता था। इस गिरोह ने VoIP कॉल्स को लोकल कॉल्स के रूप में रूट कर धोखाधड़ी की। क्या साइबर क्राइम के खिलाफ भारत की लड़ाई और मजबूत होगी? क्या हर्षित जैसे अपराधियों पर लगाम लगेगी?
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