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ISRO- विदेशी उपग्रह प्रक्षेपण में भारत बना सस्ता विकल्प

Anuj Kumar
Anuj Kumar
ISRO- विदेशी उपग्रह प्रक्षेपण में भारत बना सस्ता विकल्प

नई दिल्ली । भारी रॉकेट एलवीएम3 (LVM3) ने अपनी छठी परिचालन उड़ान और तीसरी समर्पित वाणिज्यिक उड़ान सफलतापूर्वक पूरी की है। यह प्रक्षेपण इसरो (ISRO) की वाणिज्यिक इकाई न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड और अमेरिका स्थित एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच हुए समझौते के तहत किया गया।

एलवीएम3 की छठी परिचालन और तीसरी वाणिज्यिक उड़ान

43.5 मीटर ऊंचे और दो एस200 ठोस बूस्टरों से लैस एलवीएम3 भारी रॉकेट ने लगभग 15–16 मिनट की उड़ान के बाद 6100 किलोग्राम वजनी उपग्रह को करीब 520 किलोमीटर ऊंची कक्षा में स्थापित किया।

भारतीय धरती से अब तक का सबसे भारी पेलोड

यह एलवीएम3 के इतिहास का अब तक का सबसे भारी पेलोड है, जिसे भारत से अंतरिक्ष में भेजा गया। इस सफलता ने भारत की भारी प्रक्षेपण क्षमता को वैश्विक मंच पर मजबूती से स्थापित किया है।

ब्लूबर्ड ब्लॉक-2: अगली पीढ़ी का संचार उपग्रह

ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सीधे मोबाइल (Mobile) से जुड़ने वाली अगली पीढ़ी की उपग्रह संचार प्रणाली का हिस्सा है। यह बिना किसी विशेष उपकरण के 4जी और 5जी सेवाएं देने में सक्षम है। इसका विशाल फेज्ड एरे एंटेना इसे निम्न कक्षा में तैनात सबसे बड़े वाणिज्यिक संचार उपग्रहों में शामिल करता है।

प्रक्षेपण में उच्च सटीकता का प्रदर्शन

इसरो के अनुसार नियोजित कक्षा की तुलना में वास्तविक कक्षा में केवल मामूली अंतर रहा, जो इस मिशन की उच्च सटीकता और तकनीकी दक्षता को दर्शाता है।

इसरो प्रमुख और प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया

इसरो प्रमुख ने इस उड़ान को भारत के भारी प्रक्षेपण कार्यक्रम के लिए मील का पत्थर बताया। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई देते हुए कहा कि यह मिशन गगनयान जैसे भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों की नींव को मजबूत करता है और वैश्विक वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में भारत की भूमिका को नई धार देता है।

अंतरिक्ष अब रणनीतिक शक्ति का नया मोर्चा

आज के दौर में अंतरिक्ष केवल विज्ञान का क्षेत्र नहीं रह गया है, बल्कि यह संचार, निगरानी, युद्ध और अर्थव्यवस्था से जुड़ा रणनीतिक मंच बन चुका है। ऐसे में भारी उपग्रहों को भरोसेमंद तरीके से कक्षा में पहुंचाना भारत की निर्णायक भूमिका को दर्शाता है।

वैश्विक संचार व्यवस्था में भारत की मजबूत मौजूदगी

ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 जैसे उपग्रह सीधे मोबाइल से जुड़ने वाली वैश्विक संचार संरचना का हिस्सा हैं। इससे भविष्य में युद्ध, आपदा प्रबंधन और खुफिया गतिविधियों में संचार की भूमिका और अहम होगी। भारत द्वारा ऐसे उपग्रहों का प्रक्षेपण इस नई व्यवस्था में उसकी केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करता है।

व्यावसायिक सहयोग से आगे रणनीतिक भरोसा

यह मिशन केवल अमेरिका के साथ व्यावसायिक सहयोग नहीं, बल्कि रणनीतिक भरोसे की भी पुष्टि करता है। एलवीएम3 की क्षमता भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में खड़ा करती है, जो भारी पेलोड को सटीकता से निम्न कक्षा में भेज सकते हैं।

विदेशी उपग्रह प्रक्षेपण में भारत बना भरोसेमंद विकल्प

इस उपलब्धि के साथ भारत अब विदेशी उपग्रह प्रक्षेपण के लिए सिर्फ सस्ता विकल्प नहीं, बल्कि भरोसेमंद और समयबद्ध भागीदार बनता जा रहा है। वैश्विक प्रक्षेपण बाजार में यह बढ़त चीन और यूरोप जैसे प्रतिस्पर्धियों के लिए स्पष्ट संकेत है।

सामरिक मजबूती और गगनयान की तैयारी

सामरिक दृष्टि से भारी प्रक्षेपण क्षमता का मतलब है कि भारत भविष्य में अपने सैन्य संचार, निगरानी और नेविगेशन उपग्रहों को अधिक सुरक्षित और तेजी से तैनात कर सकेगा। संकट की स्थिति में आत्मनिर्भर प्रतिक्रिया की गारंटी इसी क्षमता से मिलती है। गगनयान जैसे मानव मिशन भी इसी तकनीकी और रणनीतिक विकास की कड़ी हैं।

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