नई दिल्ली । बदलते युद्ध के स्वरूप और सीमाओं पर बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए भारतीय सेना ने अपनी सुरक्षा रणनीति को हाईटेक बना दिया है। अब पश्चिमी सीमा पर निगरानी और जवाबी कार्रवाई के लिए विशेष ड्रोन यूनिट की तैनाती शुरू कर दी गई है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था (Security Arrangements) और मजबूत होने जा रही है।
पूरी पश्चिमी सीमा पर होगी तैनाती
भारत की पाकिस्तान से लगती कश्मीर से गुजरात (Kashmir to gujrat) तक करीब 3323 किलोमीटर लंबी सीमा पर सेना ने ‘अश्नि प्लाटून’ की तैनाती शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, अगले तीन महीनों के भीतर पूरी सीमा को इस हाईटेक ड्रोन नेटवर्क से कवर कर लिया जाएगा।
क्या है ‘अश्नि प्लाटून’?
‘अश्नि प्लाटून’ (Ashwin Platoon) भारतीय सेना की नई विशेष यूनिट है, जिसे आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। हर इन्फैंट्री बटालियन में 25-30 प्रशिक्षित जवानों की यह टीम तैनात की जा रही है, जो ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक में माहिर हैं।
निगरानी के साथ हमला करने की भी क्षमता
यह यूनिट सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं है। ये जवान 24 घंटे सीमा पार की गतिविधियों पर नजर रखते हैं और जरूरत पड़ने पर सटीक हमले करने में भी सक्षम हैं। ड्रोन तकनीक के जरिए अब दुश्मन की हर गतिविधि पर रियल टाइम नजर रखी जा सकेगी।
एंटी-ड्रोन सिस्टम से भी लैस
अश्नि प्लाटून को ड्रोन जैमर और एंटी-ड्रोन गन जैसे आधुनिक उपकरणों से लैस किया जा रहा है।
इससे दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही निष्क्रिय करने की क्षमता विकसित की जा रही है, जो आने वाले समय में युद्ध का अहम हिस्सा बनेगी।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी तैयारी
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से भारतीय सेना लगातार अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत कर रही है।
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों ने भी इस दिशा में तेजी लाने का काम किया है।
चीन सीमा पर भी होगा विस्तार
रणनीति के तहत पहले चरण में तैनाती पाकिस्तान सीमा पर की जा रही है। इसके बाद दूसरे चरण में चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भी अश्नि प्लाटून तैनात की जाएगी।
मिशन ‘सुदर्शन चक्र’ को मिलेगा बल
यह पूरी पहल ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के पूरक के रूप में काम करेगी, जिसका उद्देश्य भारतीय सीमाओं को मजबूत एयर डिफेंस कवच देना है। इससे सीमा सुरक्षा में नई मजबूती आएगी और किसी भी खतरे का जवाब तेजी से दिया जा सकेगा।
अन्य पढ़े: Dakshina Kashi : सीएम तेलंगाना भी बनाएंगे उत्तर की तर्ज पर “दक्षिणा काशी”
स्वदेशी ड्रोन पर भी जोर
भारत अब अपनी जरूरतों के अनुसार स्वदेशी ड्रोन विकसित करने पर भी फोकस कर रहा है।
इससे भविष्य में देश की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और सैन्य क्षमता में भी बड़ा इजाफा होगा।
Read More :