नई दिल्ली । मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच (Iran) की अर्थव्यवस्था पर गहरा दबाव देखने को मिल रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अब तेहरान को विदेशों में भी मानवीय सहायता की अपील करनी पड़ रही है। इसी क्रम में (New Delhi) स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया के जरिए एक बैंक खाता साझा करते हुए भारतीय नागरिकों से मानवीय सहायता के लिए दान देने की अपील की है। दूतावास का कहना है कि यह पहल उन लोगों के अनुरोध के बाद की गई है जो युद्ध प्रभावित लोगों के लिए मदद करना चाहते हैं।
सोशल मीडिया के जरिए साझा किया बैंक खाता
ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि कई भारतीय नागरिकों ने मानवीय सहायता देने की इच्छा जताई थी। इसके बाद दूतावास ने ‘एम्बेसी ऑफ ईरान’ के नाम से (State Bank of India) में संचालित बैंक खाते का विवरण सार्वजनिक किया। दान देने वालों से कहा गया है कि वे भुगतान करने के बाद उसका स्क्रीनशॉट एक निर्धारित व्हाट्सएप नंबर पर भी साझा करें, ताकि सहायता का रिकॉर्ड रखा जा सके।
युद्ध और प्रतिबंधों से गहराया आर्थिक संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान की कमजोर होती आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। लंबे समय से चल रहे तनाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण देश की आय के प्रमुख स्रोत प्रभावित हुए हैं। तेल निर्यात पर असर और आर्थिक पाबंदियों ने सरकारी राजस्व को सीमित कर दिया है, जिससे आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
रियाल में गिरावट और महंगाई की चुनौती
ईरान की मुद्रा रियाल में भी तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिससे महंगाई और बढ़ गई है। आर्थिक दबाव कम करने के लिए वहां की संसद को मुद्रा प्रणाली में बदलाव जैसे कदम उठाने पड़े, लेकिन इसके बावजूद कीमतों को नियंत्रित करना चुनौती बना हुआ है।
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अन्य देशों में भी की गई मदद की अपील
भारत ही नहीं, इससे पहले मार्च की शुरुआत में Bangkok स्थित ईरानी दूतावास ने भी पुनर्निर्माण और मानवीय सहायता के लिए इसी तरह की अपील की थी। दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले Beijing में ईरानी दूतावास ने व्यक्तिगत दान स्वीकार करने से इनकार किया था, लेकिन हालिया हालात यह संकेत देते हैं कि युद्ध और आर्थिक दबाव के कारण अब तेहरान को बाहरी मदद की जरूरत अधिक महसूस हो रही है।कुल मिलाकर, मौजूदा परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि युद्ध और प्रतिबंधों के संयुक्त असर से ईरान की आर्थिक स्थिति लगातार कठिन होती जा रही है और सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवीय सहयोग की तलाश करनी पड़ रही है।
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