National- सियासत से खेसारी लाल यादव ने लिया संन्यास , बोले– “राजनीति में सच की नहीं चलती…

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खेसारी लाल यादव
खेसारी लाल यादव
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भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के चर्चित अभिनेता खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) ने राजनीति में आने की अटकलों पर आखिरकार विराम लगा दिया है। पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा तेज थी कि वे सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि उनका भविष्य फिल्मों और संगीत की दुनिया में ही है। हाल ही में रितेश पांडे के जन सुराज छोड़ भाजपा में शामिल होने की चर्चाओं और मनोज तिवारी के बयानों के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि खेसारी भी चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि अभिनेता ने इन सभी अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि वह ताउम्र एक कलाकार (Artist) ही बने रहना चाहते हैं।

“राजनीति मेरे बस की बात नहीं”

राजनीति में एंट्री को लेकर पूछे गए सवाल पर खेसारी लाल यादव ने दो टूक जवाब दिया। उन्होंने कहा, “राजनीति में कई बार परिस्थितियों के अनुसार बातें करनी पड़ती हैं, लेकिन मैं हमेशा सच बोलने में विश्वास करता हूं। वहां झूठ बोलना पड़ता है और यह मेरे स्वभाव के खिलाफ है।” उन्होंने आगे कहा कि वह जनता के बीच अपनी पहचान एक सिंगर और अभिनेता के रूप में बनाए रखना चाहते हैं। “मैं अपनी कला के माध्यम से लोगों का मनोरंजन और सेवा करना चाहता हूं। मेरी ताकत मेरा मंच (Platform) है, राजनीति नहीं,” उन्होंने स्पष्ट किया।

स्टारडम पर दिया संतुलित बयान

पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए खेसारी ने संयमित शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि स्टारडम कभी स्थायी नहीं होता। “आज कोई सुपरस्टार है, तो कल कोई और होगा। यह प्रकृति का नियम है। इसलिए किसी भी सफलता पर घमंड नहीं करना चाहिए,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि लोकप्रियता एक जिम्मेदारी है और कलाकारों को इसे समाज की बेहतरी के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।

बेटियों की सुरक्षा पर जताई चिंता

नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत और उसके परिवार को मिल रही धमकियों के मुद्दे पर खेसारी ने गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का सवाल है। उन्होंने बिहार सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की और कहा कि जिस राज्य में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, वहां शासन-प्रशासन को गंभीर आत्ममंथन करने की जरूरत है। “हर घर में एक बेटी होनी चाहिए, तभी समाज उनकी अहमियत समझ पाएगा,” उन्होंने भावुक अंदाज में कहा।

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नीतिगत फैसलों पर सधा हुआ रुख

बिहार में शराबबंदी की समीक्षा और खुले में मटन-चिकन बिक्री पर रोक जैसे प्रशासनिक निर्णयों पर खेसारी ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह सरकार का नीति (Policy) से जुड़ा विषय है और समीक्षा करना भी सरकार का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक मुद्दों पर जनता की भावनाओं को समझना जरूरी है, लेकिन किसी भी फैसले को लागू करते समय आम लोगों की रोजी-रोटी और सामाजिक संतुलन का ध्यान रखा जाना चाहिए। इस तरह खेसारी लाल यादव ने साफ कर दिया है कि फिलहाल उनका फोकस केवल फिल्मी करियर और सामाजिक सरोकारों पर है, न कि चुनावी राजनीति पर।

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Anuj Kumar

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