1000 पायलटो के साथ दी जाएगी मिग 21 को अंतिम सलामी , 71के जंग को किया जाएगा जीवंत

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नई दिल्ली, 23 सितंबर 2025: भारतीय वायुसेना के ‘फ्लाइंग कॉफिन’ (‘Flying Coffin’) के नाम से कुख्यात मिग-21 लड़ाकू विमान की विदाई अब करीब है। 62 साल की शानदार लेकिन दर्दनाक यात्रा को अलविदा कहते हुए वायुसेना 26 सितंबर को चंडीगढ़ एयर बेस पर एक भव्य समारोह आयोजित करने जा रही है। इस समारोह का खास आकर्षण होगा—1000 पूर्व और वर्तमान पायलटों द्वारा 1971 की भारत-पाक युद्ध का जीवंत रीक्रिएशन। यह न केवल विमान की विरासत को श्रद्धांजलि देगा, बल्कि उन शहीदों को भी याद करेगा जिन्होंने अपनी जान गंवाई

ऐतिहासिक विदाई का प्लान

वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समारोह में मिग-21 बाइसन के अंतिम दो स्क्वाड्रन—23 स्क्वाड्रन (पैंथर्स) और एक अन्य—को औपचारिक रूप से रिटायर किया जाएगा। यह समारोह 19 सितंबर से शुरू हो चुकी तैयारियों का चरम होगा, जिसमें 1000 पायलटों का जमावड़ा होगा। ये पायलट विभिन्न युगों से होंगे—1960 के दशक के दिग्गजों से लेकर आज के युवा फाइटर पायलटों तक।

समारोह का मुख्य आकर्षण 1971 की जंग का रीक्रिएशन होगा, जिसमें मिग-21 की उस ऐतिहासिक भूमिका को दोहराया जाएगा जब इसने पाकिस्तानी वायुसेना के कई विमानों को मार गिराया था। रीक्रिएशन में सिमुलेटेड एरियल कॉम्बैट, ग्राउंड स्ट्राइक्स और एयरफील्ड कंट्रोल के दृश्य दिखाए जाएंगे। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी आर चौधरी स्वयं समारोह में शिरकत करेंगे, और पूर्व राष्ट्रपति और युद्ध नायक एपीजे अब्दुल कलाम के सम्मान में एक विशेष ट्रिब्यूट भी होगा।

मिग-21 की गौरवपूर्ण

1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया मिग-21 भारत का पहला सुपरसोनिक फाइटर जेट था। इसने 1965, 1971, कारगिल (1999), बालाकोट एयरस्ट्राइक्स (2019) और ऑपरेशन सिंदूर जैसी कई जंगों में अहम भूमिका निभाई। 1971 की बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में तो इसने इतिहास रच दिया—भारतीय मिग-21 ने पाकिस्तानी एयरफोर्स को धूल चटा दी, जिससे युद्ध का रुख भारत के पक्ष में हो गया।

लेकिन इसकी शान के साथ दर्द भी जुड़ा। 60 सालों में 400 से ज्यादा क्रैश हुए, जिनमें 200 पायलट और 60 नागरिक मारे गए। इसे ‘फ्लाइंग कॉफिन’ कहा जाने लगा। हाल के वर्षों में भी दुर्घटनाएं रुकी नहीं—2022 में राजस्थान में दो पायलट शहीद हुए, और 2023 में एक क्रैश में दो नागरिकों की जान गई। इन हादसों के कारण वायुसेना ने 2025 तक इसे पूरी तरह फेज आउट करने का फैसला लिया।

1971 की यादें ताजा करेंगे 1000 पायलट

समारोह का हाइलाइट 1971 युद्ध का रीक्रिएशन होगा। 1000 पायलट—जिनमें 1971 के युद्ध के जीवित नायक भी शामिल होंगे—एक साथ एयर बेस पर इकट्ठा होंगे। इसमें:

  • एरियल डेमो: मिग-21 के अंतिम फ्लाइट शो, जिसमें 1971 की तरह सटीक बॉम्बिंग और एयर-टू-एयर कॉम्बैट का सिमुलेशन।
  • ग्राउंड परेड: पायलटों की यूनिफॉर्म में 1971 के युद्ध के दृश्यों का जीवंत प्रदर्शन, जिसमें मॉडल विमानों और प्रोजेक्शन का इस्तेमाल।
  • शहीदों को श्रद्धांजलि: उन 200 पायलटों की याद में एक साइलेंट ट्रिब्यूट, जिसमें उनके नाम पढ़े जाएंगे।

एक पूर्व पायलट ने कहा, “मिग-21 ने हमें सुपरसोनिक युग में ले जाकर इतिहास रचा। यह विदाई दुखद है, लेकिन नई शुरुआत भी।” वायुसेना ने बताया कि रिटायरमेंट के बाद मिग-21 को स्वदेशी तेजस एमकेआईए से रिप्लेस किया जाएगा, जिससे वायुसेना की ताकत 29 स्क्वाड्रन तक गिरेगी—लेकिन भविष्य में बढ़ेगी।

मिग-21 की विदाई के साथ एक युग का अंत हो रहा है। यह विमान न केवल सोवियत हार्डवेयर पर भारत की निर्भरता को दर्शाता था, बल्कि भारतीय सैन्य इतिहास का प्रतीक भी है। समारोह के बाद विमानों को संग्रहालयों में रखा जाएगा, जहां आने वाली पीढ़ियां उनकी कहानी सीखेंगी। वायुसेना प्रमुख ने कहा, “यह विदाई सिर्फ एक विमान की नहीं, बल्कि उन हजारों पायलटों की है जिन्होंने इसे अमर बनाया।”

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