Vande Mataram controversy : ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर लोकसभा में हुई चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला किया। उन्होंने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे को 50 साल पहले लगाए गए आपातकाल और कांग्रेस की नीतियों से जोड़ते हुए आलोचना की।
प्रधानमंत्री मोदी ने आरोप लगाया कि मोहम्मद अली जिन्ना ‘वंदे मातरम्’ के विरोधी थे और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी इसी भावना को अपनाया। उनका कहना था कि यह गीत मुसलमानों को असहज कर सकता है, इसी कारण कांग्रेस ने इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं किया।
पीएम मोदी ने कहा कि जब ‘वंदे मातरम्’ की 100वीं वर्षगांठ मनाई जा रही थी, तब देश आपातकाल की चपेट में था और संविधान को नुकसान पहुंचाया गया था। अब 150वें वर्ष में इस गीत के गौरव को फिर से स्थापित करने का अवसर है। उन्होंने इसे 1947 में भारत को आज़ादी दिलाने वाली प्रेरक शक्ति बताया।
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विवाद की जड़ 1937 के कांग्रेस अधिवेशन में लिया गया वह फैसला है, (Vande Mataram controversy) जिसमें तय किया गया था कि राष्ट्रीय आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे। उस समय तर्क दिया गया था कि गीत के कुछ अंशों में हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख कुछ समुदायों को असहज करता है।
भाजपा का आरोप है कि इस फैसले ने देश के विभाजन की नींव रखी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गीत के कुछ हिस्सों को हटाना राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने जैसा था और आज की पीढ़ी को इसके कारण समझने चाहिए।
इस बीच भाजपा नेताओं ने जवाहरलाल नेहरू द्वारा 1937 में लिखे गए पत्रों का हवाला दिया है। इन पत्रों में नेहरू ने कहा था कि ‘वंदे मातरम्’ को देवी-देवताओं से जोड़कर देखना अनुचित है, हालांकि उन्होंने यह भी लिखा कि पूरा गीत निर्दोष है और किसी को उससे आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
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