नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने अब वैश्विक समुद्री सुरक्षा और व्यापार के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने चेतावनी दी है कि युद्ध की स्थिति के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं, जहां व्यापारिक जहाजों पर लगातार हमले हो रहे हैं और हजारों जहाज फंसे हुए हैं।
होर्मुज में बढ़ा खतरा, हजारों जहाज प्रभावित
नौसेना अलंकरण समारोह में बोलते हुए एडमिरल त्रिपाठी (Admiral Tripathi) ने बताया कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद क्षेत्र में 20 से अधिक व्यापारिक जहाजों पर हमले किए गए हैं। इसके अलावा करीब 1,900 जहाज शत्रुता के कारण फंसे हुए हैं, जिससे समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
दैनिक समुद्री यातायात में भारी गिरावट
उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी कमी आई है। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 130 जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, अब यह संख्या घटकर केवल 6-7 रह गई है। यह स्थिति वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर चिंता का विषय है, खासकर भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए।
समुद्र बनते जा रहे हैं नया युद्धक्षेत्र
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में समुद्र अब केवल व्यापार का माध्यम नहीं रह गए हैं, बल्कि वे रणनीतिक टकराव के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। यहां पर शक्ति प्रदर्शन और संघर्ष के संकेत स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहे हैं।
नई तकनीकों से बढ़ा खतरा
उन्होंने आधुनिक युद्ध तकनीकों का जिक्र करते हुए कहा कि ड्रोन (Drone) मानव रहित प्रणालियां और समुद्री माइन्स जैसी तकनीकें अब बिना औपचारिक नाकाबंदी के भी महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को बाधित कर सकती हैं। इससे युद्ध की रणनीतियां और अधिक जटिल और अप्रत्याशित हो गई हैं।
चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहना जरूरी
नौसेना प्रमुख ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में संगठन स्तर पर लचीलापन और दूरदर्शिता, इकाई स्तर पर युद्ध तत्परता और व्यक्तिगत स्तर पर साहस व पेशेवर उत्कृष्टता का समन्वय बेहद जरूरी है।
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ऑपरेशन सिंदूर का भी किया जिक्र
अपने संबोधन में एडमिरल त्रिपाठी ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय नौसेना समुद्र के रास्ते पाकिस्तान पर कार्रवाई करने के बेहद करीब पहुंच गई थी, लेकिन अंतिम समय में इस्लामाबाद द्वारा सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया गया।
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