पेनलेस वैक्सीन एक प्रकार की इंजेक्शन वैक्सीन होती है, जिसमें पारंपरिक वैक्सीन की तुलना में कम या बिल्कुल भी दर्द नहीं होता। इसे खासतौर पर बच्चों के लिए तैयार किया गया है ताकि उन्हें वैक्सीनेशन का डर ना लगे।
24-30 अप्रैल तक वर्ल्ड वैक्सीनेशन वीक मनाया जाएगा. इसका मकसद लोगों को वैक्सीनेशन को लेकर अवेयर करना है. वैक्सीन का नाम सुनते ही बहुत से लोग डर जाते हैं.ऐसे में जानें पेनलेस वैक्सीन के बारे में.
कैसे काम करती है?
पेनलेस वैक्सीन में लाइव बैक्टीरिया या वायरस की जगह पर इनऐक्टिवेटेड (अक्रिय) या रीकॉम्बिनेंट तत्व होते हैं, जिससे शरीर को संक्रमण का खतरा नहीं होता और दर्द भी नहीं होता।
पेनलेस वैक्सीन के फायदे
1. बच्चों को टीका लगवाने में सबसे ज्यादा डर लगता है. पेनलेस वैक्सीन से ये डर काफी हद तक कम हो जाता है. यह बच्चों के लिए बेस्ट ऑप्शन है.
2. आम वैक्सीन के बाद कई बार हाथ में सूजन, लालपन या तेज दर्द हो जाता है. पेनलेस वैक्सीन से ऐसा बहुत कम होता है.
3. कुछ वैक्सीन के बाद हल्का बुखार या शरीर में थकान महसूस होती है. पेनलेस वैक्सीन से ये लक्षण बहुत ही कम देखने को मिलते हैं.
4. नीडल फोबिया यानी सुई का डर बहुत आम होता है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए. पेनलेस वैक्सीन इस डर को दूर करने में मदद करती है.
5. जब वैक्सीन पेनलेस (Painless) होती है तो लोग खुद भी लगवाने में हिचकिचाते नहीं हैं. इससे हेल्थ सिस्टम पर भी अच्छा असर पड़ता है.
एक्सपर्ट्स के अनुसार, पेनलेस वैक्सीन का असर भी उतना ही होता है जितना नॉर्मल वैक्सीन का. अंतर सिर्फ इनता है कि ये कम दर्द वाली होती है और रिएक्शन का खतरा कम होती है. कई डॉक्टर्स पेनलेस वैक्सीन को बच्चों के लिए अच्छा मानते हैं.
पेनलेस वैक्सीन के नुकसान
1. सीमित प्रभावकारिता
कुछ रिसर्च के अनुसार, पेनफुल वैक्सीन की तुलना में पेनलेस वैक्सीन का इम्यून रिस्पॉन्स थोड़ा कमजोर हो सकता है, खासकर कुछ बीमारियों के खिलाफ।
2. अधिक डोज की आवश्यकता
पेनलेस वैक्सीन में इम्युनिटी धीरे बनती है, इसलिए कई बार बूस्टर डोज की जरूरत होती है।
3. कीमत अधिक हो सकती है
पेनलेस वैक्सीन की लागत पारंपरिक वैक्सीन से अधिक हो सकती है, जिससे यह सभी के लिए किफायती विकल्प नहीं बन पाती।