PM मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian को किया फोन, अमेरिकी हमलों के बाद तनाव कम करने की अपील

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पीएम मोदी ने अमेरिकी हवाई हमलों के बारे में की चर्चा

मध्य पूर्व में लगातार बिगड़ते हालात और अमेरिका (America) द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के बाद दुनिया भर की नजरें इस क्षेत्र पर टिकी हुई हैं। ऐसे संवेदनशील समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian) से फोन पर बातचीत की। इस दौरान, पीएम मोदी ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों पर अमेरिकी हवाई हमलों के बारे में चर्चा की। उन्होंने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए शत्रुता में तत्काल कमी लाने का आह्वान किया। गौरतलब है कि अमेरिका ने हाल ही में ईरान के इन तीन परमाणु केंद्रों पर हमला कर उन्हें पूरी तरह से नष्ट कर दिया है, जिससे क्षेत्र में चल रहे संघर्ष में और इजाफा हुआ है।

मोदी ने क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए कहा

पीएम मोदी ने कॉल के बाद एक्स पर लिखा, ‘हमने मौजूदा स्थिति के बारे में विस्तार से चर्चा की। हाल ही में हुई वृद्धि पर गहरी चिंता व्यक्त की। आगे बढ़ने के तरीके के रूप में तत्काल कमी लाने, बातचीत और कूटनीति के लिए हमारे आह्वान को दोहराया और क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए कहा।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका द्वारा ईरान के तीन प्रमुख परमाणु प्रतिष्ठानों – फोर्डो, नतांज और इस्फ़हान पर बमबारी करने के कुछ ही घंटों बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को फोन किया।

युद्ध नहीं, वार्ता को दी जाती है प्राथमिकता

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में इन हमलों को ‘शानदार सैन्य सफलता’ बताया। उन्होंने ईरान को चेतावनी भी दी कि यदि उसने जवाबी कार्रवाई की तो और भी हमले किए जाएंगे। ट्रंप ने कहा कि इस मिशन का प्राथमिक लक्ष्य ईरान की परमाणु संवर्धन क्षमताओं को नष्ट करना था और यह हासिल कर लिया गया है। अमेरिकी हमलों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए, ईरानी विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने इन कार्रवाइयों को अंतर्राष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का गंभीर उल्लंघन करार दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए सभी संबंधित पक्षों से तत्काल तनाव कम करने और आपसी बातचीत की अपील की। उनका यह कदम भारत की स्थायी विदेश नीति को दर्शाता है, जिसमें युद्ध नहीं, वार्ता को प्राथमिकता दी जाती है।

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