नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट (AI Impact summit) 2026 के दौरान हुए हंगामे पर दिल्ली की एक अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रवि की कोर्ट ने विरोध प्रदर्शन के तरीके की तीखी आलोचना करते हुए इसे असहमति जताने का अनुचित तरीका करार दिया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया यह शर्टलेस विरोध प्रदर्शन सार्वजनिक व्यवस्था पर सीधा हमला था, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की कूटनीतिक छवि को भी नुकसान पहुंचाया। इस मामले में गिरफ्तार किए गए चार कार्यकर्ताओं को कोर्ट ने शनिवार को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
चार कार्यकर्ता पुलिस हिरासत में
गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों में बिहार से युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कृष्णा हरि, बिहार के प्रदेश सचिव कुंदन यादव, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार और तेलंगाना (Telangana) के नरसिंह यादव शामिल हैं। दिल्ली पुलिस की हिरासत संबंधी अर्जी स्वीकार करते हुए मजिस्ट्रेट ने टिप्पणी की कि आरोपी देश के विभिन्न दूर-दराज के इलाकों से ताल्लुक रखते हैं, जिससे उनके फरार होने की आशंका है। कोर्ट ने जांच के प्रारंभिक निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि घटना के पीछे किसी बाहरी साजिश के संकेत भी मिल रहे हैं।
हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र में घुसने की साजिश का आरोप
अदालत के आदेश के अनुसार, आरोपियों ने वैश्विक प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी वाले हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र भारत मंडपम में घुसने की कथित साजिश रची। प्रदर्शनकारियों ने ऐसी टी-शर्ट पहन रखी थीं, जिन पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के संदर्भ में प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लिखे थे। पुलिस रिकॉर्ड और मेडिको-लीगल मामलों (एमएलसी) के आधार पर यह भी सामने आया है कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डाली गई और पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की गई, जिससे कुछ को चोटें आईं।
लोकतांत्रिक विरोध की सीमाओं पर कोर्ट की टिप्पणी
मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा कि लोकतंत्र में असहमति जताने का अधिकार सभी को है, लेकिन इस तरह का आचरण वैध विरोध की सीमाओं का उल्लंघन करता है। समिट जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के दौरान ऐसी घटनाएं विदेशी प्रतिनिधियों के समक्ष देश की छवि को प्रभावित करती हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपियों के कुछ सहयोगी फरार हो सकते हैं और वे डिजिटल साक्ष्यों या वित्तीय सुरागों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।
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गंभीर धाराओं में दर्ज मामला
अदालत ने गहन जांच की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यह घटना सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 121 (लोक सेवक को कर्तव्य से रोकने के लिए चोट पहुंचाना) और धारा 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया गया है। चारों आरोपियों को 25 फरवरी तक पुलिस हिरासत में रखकर पूछताछ की जाएगी। इस घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राजनीतिक विरोध के तौर-तरीकों पर भी नई बहस छेड़ दी है।
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