नई दिल्ली, आवारा कुत्तों को पकड़ने और उन्हें सुरक्षित जगहों पर रखने का मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) गवई के सामने भी उठाया गया है. इस मुद्दे को उठाते हुए वकील ने CJI से कहा कि यह सामुदायिक कुत्तों के संबंध में है.जस्टिस जेके माहेश्वरी की एक अन्य पीठ ने कुत्तों को मारने और पुनर्वास के खिलाफ निर्देश दिया है. वकील इस दलील पर CJI गवई ने कहा कि वह इसे देखेंगे.
वकील ने CJI बीआर गवई के समक्ष उल्लेख किया कि यह मामला पहले से ही एक अलग पीठ के समक्ष लंबित है और नोटिस जारी किया गया था. उन्होंने अदालत को सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश के बारे में भी बताया जिसमें आवारा कुत्तों को मारने पर रोक लगाई गई थी. और आवारा कुत्तों के लिए मौजूदा कानूनों और नियमों का पालन अनिवार्य किया गया था. CJI गवई ने आगे कहा कि लेकिन दूसरी पीठ पहले ही आदेश पारित कर चुकी है.
सुप्रीम कोर्ट का रुख
28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया, जिसमें देश में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं और रैबीज के कारण होने वाली मौतों का जिक्र था। जस्टिस जे. बी. परदीवाला और आर. महादेवन की बेंच ने इस स्थिति को “बेहद परेशान करने वाला और खतरनाक” बताया। 2024 में भारत में 37 लाख से अधिक कुत्तों के काटने के मामले दर्ज किए गए, जिनमें 54 संदिग्ध रैबीज से मौतें हुईं।
कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए इसे मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का आदेश दिया। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी आवारा कुत्तों को खाना खिलाने और उनकी देखभाल से जुड़े कई मामलों पर सुनवाई की है। मई 2022 में, कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2021 के उस आदेश पर लगी रोक हटा दी थी, जिसमें कहा गया था कि आवारा कुत्तों को भोजन देने का अधिकार नागरिकों को है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी गतिविधियों से सार्वजनिक असुविधा नहीं होनी चाहिए।
पिछली घटनाएँ और चर्चाएँ
आवारा कुत्तों की समस्या पर चर्चा तब और तेज हुई जब सितंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट में एक वकील, कुणाल चटर्जी, पट्टी बंधे हुए कोर्ट में पहुंचे। CJI चंद्रचूड़ ने पूछा तो उन्होंने बताया कि उन्हें पांच कुत्तों ने काट लिया था। इस घटना ने कोर्ट में आवारा कुत्तों के खतरे पर बहस छेड़ दी। इसके अलावा, जून 2023 में केरल में एक नौ साल की बच्ची पर कुत्तों के झुंड के हमले और उत्तर प्रदेश में एक किशोर की रैबीज से मौत ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया।
सरकारी कदम और नीतियाँ
केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि 2024 में कुत्तों के काटने के 37,17,336 मामले दर्ज हुए, और रैबीज से 54 संदिग्ध मौतें हुईं। सरकार ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियम, 2023 लागू किए हैं, जो आवारा कुत्तों की नसबंदी और रैबीज-रोधी टीकाकरण पर जोर देते हैं। केंद्रीय मंत्री एस. पी. सिंह बघेल ने कहा कि स्थानीय निकाय इस कार्यक्रम को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं।
चुनौतियाँ और विवाद
आवारा कुत्तों की समस्या ने पशु प्रेमियों और आम नागरिकों के बीच एक जटिल बहस को जन्म दिया है। एक तरफ, पशु कल्याण संगठन कुत्तों के अधिकारों और उनकी देखभाल की वकालत करते हैं, वहीं दूसरी तरफ, कुत्तों के हमलों से प्रभावित लोग सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस संतुलन को बनाए रखने की कोशिश की है, लेकिन यह मुद्दा अभी भी अनसुलझा है।
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम आवारा कुत्तों की समस्या को हल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। CJI चंद्रचूड़ का बयान इस बात का संकेत है कि कोर्ट इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहा है। लेकिन क्या यह मानव सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन स्थापित कर पाएगा? यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है। देश की जनता और पशु प्रेमी इस मामले में कोर्ट के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।
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