उत्तर प्रदेश। मां विंध्यवासिनी धाम को हिन्दू धर्म में प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है। उनके एकमात्र दर्शन से श्रद्धालुओं का संकट कट जाता है। विंध्याचल पर्वत पर विराजमान होने के कारण इन्हें मां विंध्यवासिनी कहा जाता है, इसलिए क्योंकि वे विंध्याचल पर्वत पर विराजमान हैं। विंध्याचल पर्वत को जाग्रत शक्तिपीठ माना जाता है और मां विंध्यवासिनी को यहां की पूर्णपीठ माना जाता है।
मंदिर का इतिहास हजार साल पुराना
मां Vindhyavasini मंदिर को लेकर मान्यता है कि यह मंदिर हजारों साल पुराना है और इसका उल्लेख प्राचीन हिंदू ग्रंथों और पुराणों में किया गया है। बताया जाता है कि यह स्थान मां दुर्गा के अवतार मां विंध्यवासिनी का निवास स्थान है। यहां देवी माता की पूजा महिषासुर मर्दिनी के रूप में की जाती है।
यह मंदिर त्रिकोणीय शक्तिपीठों में से एक
मां विंध्यवासिनी मंदिर त्रिकोणीय शक्तिपीठों में से एक है, जहां मां Vindhyavasini, मां काली और मां अष्टभुजा के रूप में तीन प्रमुख देवी पूजित होती हैं। यह शक्ति पीठ भारत के अन्य 51 शक्ति पीठों शामिल है, हालांकि यहां माता सती के शरीर को कोई अंग नहीं गिरा है। लेकिन मान्यता है कि देवी मां इस स्थान पर सशरीर निवास करती हैं। मान्यता है कि विंध्यवासिनी देवी के आशीर्वाद से ही इस सृष्टि का विस्तार हुआ है।
सच्चे मन से दर्शन करने वालों का कट जाता है संकट
देवी मां विंध्यवासिनी को शक्ति और ऊर्जा का स्रोत माना गया है। उनकी पूजा से मनोकामनाओं पूरी होती है। सच्चे मन से मां के दर्शन करने पर श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूर्ण होती है। मां विंध्यवासिनी की कृपा से भक्तों को स्वास्थ्य, समृद्धि तथा सुख-शांति का आशीर्वाद मिलता है।
माता विंध्यवासिनी के दर्शन से होती है यश और धन की प्राप्ति
ऐसा कहा जाता है कि मां विंध्यवासिनी देवी कालीखोह व अष्टभुजा के दर्शन करने से यश-कीर्ति व धन की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस मंदिर में दर्शन करने के लिए श्रद्धालु उत्तर प्रदेश ही नहीं बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश , तेलंगाना, महाराष्ट्र और देश के तमाम राज्यों से हर साल लाखों की संख्या में दर्शन करने पहुंचते हैं। हर वर्ष यहां करीब 10-12 लाख श्रद्धालु नवरात्रि के दौरान मां के दर्शन करने आते हैं।
नवरात्रि पर विंध्यवासिनी मंदिर पर विशेष आयोजन
नवरात्रि के पावन अवसर पर मां विंध्यवासिनी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और भव्य आयोजन होते हैं। यहां पर नवरात्रि मेला लगता है, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालु भाग लेने आते हैं। मंदिर प्रांगण को विशेष रूप से सजाया जाता है और भक्त दिन-रात मां विंध्यवासिनी की आराधना में लीन रहते हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में मंदिर की पवित्रता और भव्यता चरम पर होती है।
हवाई और रेल मार्ग से पहुंच जा सकता है विंध्यवासिनी धाम
मां विंध्यवासिनी मंदिर तक पहुंचनने के लिए हवाई और रेल मार्ग दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। यूपी के मिर्ज़ापुर रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी करीब 8 किलोमीटर है, यहां से ऑटो या टैक्सी के जरिए जा सकते है। इसके अलावा निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी है, जो करीब 60 किलोमीटर दूर पर है। वाराणसी से सीधा बस या टैक्सी द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। लोग अपने निजी साधन के इस्तेमाल से पहुंच सकते हैं।