Pakistan: पाकिस्तान का चीन से मोहभंग

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अमेरिका की ओर झुका पाकिस्तान

इस्लामाबाद: पाकिस्तान(Pakistan) और चीन(China) के बीच दशकों से चले आ रहे आर्थिक और रक्षा सहयोग में दरार आ गई है। अरबों डॉलर के कर्ज और सैन्य उपकरण मिलने के बावजूद, पाकिस्तान अब अमेरिका के करीब जाने की रणनीति अपना रहा है। इस बदलाव के पीछे हालिया सैन्य घटनाक्रम, भारत की सक्रिय भूमिका और अमेरिकी हथियारों के आकर्षण का बड़ा हाथ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पाकिस्तान को भविष्य में भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर सकता है

चीन का बड़ा निवेश और भरोसे में दरार

पिछले दस वर्षों में चीन ने पाकिस्तान(Pakistan) में सीपीईसी के तहत 83 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। इसमें बंदरगाह, हाईवे, ऊर्जा संयंत्र और रक्षा क्षेत्र में व्यापक सहायता शामिल है। चीनी कंपनियां पाकिस्तान(Pakistan) के 80% से अधिक सैन्य उपकरणों की आपूर्तिकर्ता रही हैं। इसके बावजूद, पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व का रुख अब अमेरिका की ओर है।


पूर्व तोपखाना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में भारत द्वारा पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय किए जाने के बाद, इस्लामाबाद का चीनी हथियारों पर भरोसा कमजोर हुआ। यही कारण है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने अमेरिका(America) से खुले तौर पर रणनीतिक समर्थन और उन्नत हथियारों की मांग की।

मुफ्त हथियार और अमेरिकी रणनीति

अमेरिका पाकिस्तान(Pakistan) के जरिए ईरान, अफगानिस्तान, चीन और भारत पर प्रभाव बनाए रखना चाहता है। वाशिंगटन ने पाकिस्तान को राजनयिक संरक्षण, FATF की वॉचलिस्ट से हटाने और F-16 जैसे उन्नत सैन्य विमान उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है।
शंकर का कहना है कि चीन से मिलने वाले कर्ज को चुकाना पाकिस्तान के लिए अनिवार्य होगा, जबकि अमेरिका से हथियार मुफ्त में मिल सकते हैं। इसी कारण पाकिस्तान अब अमेरिका की ओर झुकाव दिखा रहा है और चीन पर दबाव बनाने की योजना बना रहा है कि कर्ज चुकाने से पहले वह खुद पीछे हट जाए।

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Pakistan leans towards America

चीन को कड़ा संदेश

रिटायर्ड जनरल जीडी बख्शी ने चीन को आगाह किया है कि पाकिस्तान का यह रुख उसकी प्रतिष्ठा और रणनीतिक स्थिति को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि चीन को अपने उच्च श्रेणी के हथियार पाकिस्तान(Pakistan) को देने से पहले सोचना चाहिए, क्योंकि वहां उन्हें संभालने की तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव है।
उनके अनुसार, पाकिस्तानी जनरल अवसरवादी और अविश्वसनीय हैं, जिन्होंने अरबों डॉलर के निवेश और 80% हथियार मिलने के बाद भी चीन को छोड़ दिया। यह चीन के लिए गंभीर चेतावनी है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार का लंबा निवेश जोखिम भरा साबित हो सकता है।

पाकिस्तान ने अमेरिका की ओर रुख क्यों किया?

पाकिस्तान को लगा कि अमेरिका से उन्नत हथियार, राजनयिक संरक्षण और वित्तीय लाभ मुफ्त में मिल सकते हैं, जबकि चीन से केवल कर्ज ही मिलेगा जिसे चुकाना पड़ेगा।

ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान के फैसले को कैसे प्रभावित किया?

इस सैन्य कार्रवाई में भारत ने पाकिस्तान की वायु रक्षा और परमाणु हथियार डिलीवरी क्षमता को पंगु कर दिया, जिससे पाकिस्तानी नेतृत्व का चीनी हथियारों पर भरोसा हिल गया।

चीन को पाकिस्तान से क्या खतरा है?

पाकिस्तान के धोखेबाज रवैये और तकनीकी क्षमता की कमी के कारण चीन का भारी निवेश और हथियार गलत हाथों में पड़ सकते हैं, जिससे उसकी रणनीतिक स्थिति और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है।

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Dhanarekha

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