हैदराबाद। बीसी आयोग के अध्यक्ष जी. निरंजन (G. Niranjan) एवं सदस्य रापोलु जयप्रकाश, तिरुमलागिरी सुरेंद्र, बाललक्ष्मी ने दक्षिण तेलंगाना विद्युत वितरण निगम (टीजीएसपीडीसीएल) का दौरा किया और संस्थान में आरक्षण के पालन में पिछड़ी जातियों को हुए अन्याय तथा अन्य संबंधित मुद्दों की विस्तृत जांच की। इस अवसर पर विद्युत निगम के सीएम डी. जितेश वी. पाटिल, निदेशक सी.एच. चक्रपाणी, अधिकारी भास्कर, मुजीबुल्ला खान तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे। साथ ही तेलंगाना इलेक्ट्रिसिटी बीसी कर्मचारियों का एसोसिएशन के अध्यक्ष कुमारस्वामी (Kumaraswamy) और संघ के सदस्य भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
नियुक्तियों का विवरण आयोग को उपलब्ध कराने का निर्देश
आयोग ने 2014 से 2026 के बीच हुई नियुक्तियों का विवरण आयोग को उपलब्ध कराने का निर्देश जारी किया। इसके अलावा, विभिन्न लंबित कोर्ट मामलों से संबंधित जानकारियों की समीक्षा के लिए संस्था को एक समिति बनाने, कर्मचारियों के प्रमोशन, वरिष्ठता और अन्य मुद्दों की जांच करने के निर्देश भी दिए गए। पूर्व में स्थापित बीसी सेल के लिए आवास सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए गए। बैठक में बीसी आयोग के सहायक सचिव के. मनोहर राव, विशेष अधिकारी कुमारी एन. सुनीता, सेक्शन अधिकारी जी. सतीश कुमार, रिसर्च अधिकारी जी. लक्ष्मीनारायण एवं अन्य कर्मचारी भी उपस्थित थे।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के वर्तमान अध्यक्ष कौन हैं?
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) के वर्तमान अध्यक्ष हंसराज गंगाराम अहीर हैं। इन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया गया है और ये आयोग के प्रमुख के रूप में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से जुड़े मामलों की निगरानी करते हैं। आयोग का मुख्य कार्य सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना, उनकी शिकायतों की जांच करना तथा सरकार को नीतिगत सुझाव देना होता है।
NCBC के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के प्रथम अध्यक्ष राम नंदन प्रसाद थे। आयोग की स्थापना के समय इन्हें इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी दी गई थी। इनके नेतृत्व में आयोग ने पिछड़े वर्गों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम शुरू किया और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सिफारिशें कीं, जिससे आगे चलकर OBC वर्ग के कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान मिला।
Obc आयोग का गठन कब हुआ था?
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन 14 अगस्त 1993 को किया गया था। इसे संसद द्वारा पारित कानून के तहत स्थापित किया गया था, ताकि अन्य पिछड़ा वर्ग के हितों की रक्षा की जा सके। बाद में 2018 में संविधान संशोधन के माध्यम से इसे संवैधानिक दर्जा दिया गया। इसके बाद आयोग की शक्तियों और जिम्मेदारियों में वृद्धि हुई, जिससे यह OBC वर्ग के अधिकारों की सुरक्षा में और अधिक प्रभावी बन गया।
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