Hyderabad : ध्यान वनम में बोधगया से लाए गए लगाए गए बोधि पौधे

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बोधगया
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बुद्ध वंदना से हुई पौधारोपण कार्यक्रम की शुरुआत

हैदराबाद। गुरुवार को धम्मचक्र परिवर्तन दिवस (Dhammachakra Transformation Day) के अवसर पर नलगोंडा के बुद्धवनम में ध्यान वनम में बोधगया से लाए गए बोधि पौधे लगाए गए। यह समारोह उस दिन को चिह्नित करने के लिए आयोजित एक समारोह का हिस्सा था जब गौतम बुद्ध (Gautam Buddha) ने सारनाथ में पांच तपस्वियों को अपना पहला उपदेश दिया था, जिसे अब हर साल आषाढ़ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। पूर्व मंत्री जना रेड्डी, बुद्धवनम के विशेष अधिकारी मल्लेपल्ली लक्ष्मैया और भिक्षु संघपाल बंतेजी के नेतृत्व में पौधारोपण कार्यक्रम की शुरुआत बुद्ध वंदना से हुई। छात्रों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी इसमें भाग लिया। पौधे सीआईडी की अतिरिक्त महानिदेशक चारु सिन्हा ने भेंट किए

स्वयं बुद्ध के जीवनकाल में ही आया था बौद्ध धर्म

मल्लेपल्ली लक्ष्मैया ने तेलुगु क्षेत्र में बौद्ध धर्म की गहरी ऐतिहासिक जड़ों पर प्रकाश डालते हुए कहा, ‘बौद्ध धर्म इस भूमि पर स्वयं बुद्ध के जीवनकाल में ही आया था। वर्तमान निर्मल जिले के भावरी ने अपने शिष्यों को सीधे बुद्ध से शिक्षा लेने के लिए भेजा था। यहीं से हमारे क्षेत्र की बौद्ध विरासत की शुरुआत हुई।’ उन्होंने कहा कि 2002 में शुरू की गई बुद्धवनम परियोजना, धीरे-धीरे शिक्षा के केंद्र के रूप में उभर रही है। लक्ष्मैया ने वरिष्ठ नेता जन रेड्डी की महत्वपूर्ण भूमिका की भी सराहना की, खासकर 2002 में कृष्णा नदी के बाएं किनारे पर ज़मीन हासिल करने में, जिसने इस परियोजना की नींव रखी।

बोधगया

हमारे सांस्कृतिक अतीत का प्रतीक है बुद्धवनम

पूर्व मंत्री जना रेड्डी ने कहा कि बुद्धवनम सिर्फ़ एक पर्यटन परियोजना नहीं, बल्कि हमारे सांस्कृतिक अतीत का प्रतीक है। यह शांति, समानता और ज्ञान के उस संदेश को दर्शाता है जिसके लिए बुद्ध ने अपना जीवन समर्पित किया था। सिद्धार्थ की भूमिका निभाने वाले बॉलीवुड अभिनेता गगन मलिक ने कहा कि वह बुद्धवनम और बौद्ध राष्ट्रों के बीच एक सेतु का काम करेंगे। एमएलसी शंकर नाइक, दैवज्ञ शर्मा सहित अन्य लोग, विश्वविद्यालय के छात्र और बीसी वेलफेयर रेजिडेंशियल कॉलेज के प्रतिभागी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में क्षेत्र की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण के साझा प्रयास पर प्रकाश डाला गया।

बोधगया क्यों प्रसिद्ध है?

Bodh Gaya बिहार में स्थित एक प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थल है, जहाँ भगवान गौतम बुद्ध को बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था। यह स्थान बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र है।

बोधगया का अर्थ क्या होता है?

Bodh Gaya का अर्थ है “ज्ञान प्राप्ति का स्थान”। यह वह पवित्र स्थान है जहाँ गौतम बुद्ध को बोधिवृक्ष के नीचे आत्मज्ञान प्राप्त हुआ था। यह बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल है।

बोधगया में कौन सा पेड़ है?

Bodh Gaya में स्थित पवित्र पेड़ को बोधिवृक्ष कहा जाता है। इसी वृक्ष के नीचे गौतम बुद्ध ने ध्यान लगाकर ज्ञान प्राप्त किया था। यह पीपल का पेड़ है और बौद्ध धर्म में अत्यंत पूजनीय माना जाता है।

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