हैदराबाद। तेलंगाना आंदोलनकारियों की पहचान के लिए गठित समिति की पहली बैठक (First Meeting) समिति के अध्यक्ष के. केशव राव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में समिति के सदस्य के रूप में मंत्री पोन्नम प्रभाकर, एमएलसी प्रो. कोदंडराम, अदांकी दयाकर, पूर्व एमएलसी रामुलु नायक तथा मोत्थे शोभन रेड्डी उपस्थित रहे। बैठक में तेलंगाना आंदोलनकारियों (The protesters) की पहचान के लिए सरकार द्वारा समिति गठित किए जाने पर मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के प्रति आभार व्यक्त किया गया। निर्णय लिया गया कि अमरवीरों की ज्योति के नीचे स्थित कार्यालय में ही आंदोलनकारियों की पहचान समिति का कार्यालय स्थापित किया जाएगा। साथ ही अमरवीरों की पहचान को लेकर शीघ्र ही सर्वदलीय बैठक आयोजित कर सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे।
सक्रिय आंदोलन संगठनों से लिए जाएंगे प्रस्ताव
समिति ने यह भी तय किया कि तेलंगाना आंदोलन जेएसी, 1969 आंदोलनकारियों, कर्मचारी संगठनों, कलाकारों के जेएसी, विभिन्न जाति एवं वर्ग संगठनों, वकीलों के जेएसी तथा जिलों में सक्रिय आंदोलन संगठनों से प्रस्ताव लिए जाएंगे। इसके अलावा व्यापक जनमत संग्रह के लिए जिला स्तर पर दौरे भी किए जाएंगे। आंदोलनकारियों की पहचान के लिए चार श्रेणियों का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इनमें आंदोलन में शहीद हुए लोगों को प्रथम प्राथमिकता, आंदोलन के दौरान घायल हुए लोग दूसरी श्रेणी में, जेल गए, गिरफ्तार हुए या मुकदमे झेलने वाले तीसरी श्रेणी में, जमीनी स्तर पर सक्रिय रूप से आंदोलन में भाग लेने वाले चौथी श्रेणी में, जिनकी पहचान दस्तावेज़ और समाचार कतरनों के आधार पर की जाएगी।
इसके अलावा 1969, 1972 और 1996 के तेलंगाना आंदोलनों से जुड़े लोगों से भी सुझाव लेने का निर्णय लिया गया है। समिति ने स्पष्ट किया कि पहचान प्रक्रिया पूरी तरह राजनीतिक प्रभाव से मुक्त और पारदर्शी होगी। पूर्व सरकार में सीमित लोगों को ही लाभ मिलने की बात का उल्लेख करते हुए इस बार सभी योग्य आंदोलनकारियों को न्याय देने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के केरल दौरे से लौटने के बाद इस बैठक की सिफारिशों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
तेलंगाना में हिंदुओं की आबादी कितनी है?
हिंदू धर्म मानने वाले लोगों की आबादी सबसे अधिक है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की लगभग 85 प्रतिशत जनसंख्या हिंदू है। इसके अलावा मुस्लिम, ईसाई और अन्य धर्मों के लोग भी यहां निवास करते हैं। हैदराबाद सहित कई क्षेत्रों में विभिन्न समुदायों की सांस्कृतिक विविधता देखने को मिलती है। राज्य में मंदिर, त्योहार और पारंपरिक धार्मिक आयोजन सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। नई जनगणना के बाद आंकड़ों में कुछ बदलाव संभव हो सकता है।
तेलंगाना राज्य का मुख्य भोजन क्या है?
पारंपरिक भोजन मसालेदार और स्थानीय स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। यहां चावल मुख्य भोजन माना जाता है और इसके साथ दाल, सब्जियां तथा मांसाहारी व्यंजन भी लोकप्रिय हैं। हैदराबादी बिरयानी, सरवा पिंडी, साकिनालु और पच्ची पुलुसु जैसे व्यंजन राज्य की खास पहचान हैं। ग्रामीण इलाकों में ज्वार और बाजरे से बने खाद्य पदार्थ भी खाए जाते हैं। त्योहारों और पारिवारिक समारोहों में पारंपरिक तेलंगाना भोजन विशेष रूप से तैयार किया जाता है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री किस जाति से हैं?
ए. रेवंत रेड्डी रेड्डी समुदाय से संबंध रखते हैं। यह समुदाय तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में प्रभावशाली सामाजिक समूहों में गिना जाता है। उन्होंने राज्य की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई है और कई महत्वपूर्ण पद संभाले हैं। कांग्रेस पार्टी के नेता के रूप में उन्होंने चुनाव में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। मुख्यमंत्री बनने के बाद वे प्रशासन, विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
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