Hyderabad : पूर्व आईपीएस अधिकारी का एसआईटी नोटिस पर हमला

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प्रवीण ने लगाया राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप

हैदराबाद। बीआरएस नेता और पूर्व आईपीएस अधिकारी आर.एस. प्रवीण कुमार (R.S. Praveen Kumar) ने शनिवार को एसआईटी द्वारा उन्हें जारी नोटिस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और पुलिस पर राजनीतिक पक्षपात के साथ विरोध को दबाने का आरोप लगाया। प्रवीण कुमार ने कहा कि नोटिस उनके निवास पर आधी रात के करीब भेजा गया, केवल 12 घंटे के भीतर, जब उन्होंने वरिष्ठ बीआरएस नेताओं के.टी. रामाराव (KTR) और टी. हरीश राव के कथित उत्पीड़न की आलोचना की थी, जिन्हें फोन टैपिंग मामले में कई घंटे पूछताछ के लिए बुलाया गया। उन्होंने मीडिया से कहा, सार्वजनिक मुद्दों और अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज उठाना मेरा संवैधानिक अधिकार है। पुलिस की चेतावनियों से मैं डरने वाला नहीं हूँ।

न तो किसी पर व्यक्तिगत हमला और न ही अपशब्दों का प्रयोग

बीआरएस नेता ने स्पष्ट किया कि उन्होंने न तो किसी पर व्यक्तिगत हमला किया और न ही अपशब्दों का प्रयोग किया, और उन्होंने कहा कि वे अन्याय के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे। प्रवीण कुमार ने एसआईटी नोटिस में उल्लेखित आरोप को भी खारिज किया कि उन्होंने एसआईटी प्रमुख वी.सी. सज्जनार के खिलाफ अलग एसआईटी की मांग की। उन्होंने कहा कि 2015 के कैश-फॉर-वोट मामले के समय, जब तत्कालीन टीडीपी विधायक रेवंथ रेड्डी कैमरे में पकड़े गए थे, तब आंध्र प्रदेश में तेलंगाना सरकार और खुफिया अधिकारियों द्वारा कथित फोन टैपिंग के कई मामले दर्ज किए गए थे।

उस समय तेलंगाना इंटेलिजेंस विभाग में कार्यरत थे सज्जनार

उन्होंने कहा कि सज्जनार उस समय तेलंगाना इंटेलिजेंस विभाग में कार्यरत थे, इसलिए उन्हें इस दूसरी एसआईटी की अध्यक्षता करना नैतिक रूप से अनुचित है। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता के रूप में यह उनका कर्तव्य है कि वे दबाई गई समस्याओं को सार्वजनिक करें। उन्होंने रेवंत रेड्डी सरकार के तहत हुए कई कथित घोटालों की जांच के लिए एसआईटी की मांग की, जिसमें कोयला घोटाला भी शामिल है। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस ने इस तरह के लगातार हमलों पर कार्रवाई क्यों नहीं की और क्यों मुख्यमंत्री रेवंथ रेड्डी के खिलाफ शिकायतों पर कोई नोटिस जारी नहीं किया गया।

IAS और IPS में क्या अंतर है?

आईएएस अधिकारी प्रशासन, नीति निर्माण और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालते हैं, जबकि आईपीएस अधिकारी पुलिस, कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कार्य देखते हैं। आईएएस का दायरा प्रशासनिक होता है, वहीं आईपीएस का फोकस सुरक्षा और अपराध नियंत्रण पर रहता है।

IPS के लिए कितनी पढ़ाई चाहिए?

उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (ग्रेजुएशन) होना आवश्यक है। विषय कोई भी हो सकता है। इसके बाद संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा पास करनी होती है, जिसमें प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार शामिल हैं।

एक आईपीएस की सैलरी कितनी होती है?

प्रशिक्षण के बाद शुरुआती वेतन लगभग 56,100 रुपये प्रति माह होता है। पदोन्नति के साथ यह बढ़ता जाता है और डीजीपी स्तर पर वेतन 2 लाख रुपये प्रति माह से अधिक हो सकता है। इसमें भत्ते, सरकारी आवास और अन्य सुविधाएं भी शामिल रहती हैं।

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Ajay Kumar Shukla

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Ajay Kumar Shukla

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