Hyderabad : इसरो प्रमुख डॉ. वी नारायणन को जीपी बिड़ला मेमोरियल पुरस्कार

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जो एक दूरदर्शी व्यक्ति थे जी.पी. बिड़ला

हैदराबाद। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी नारायणन को प्रतिष्ठित जीपी बिड़ला मेमोरियल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पूर्व में लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार (lifetime Achievement Award) के नाम से जाना जाने वाला यह सम्मान जी.पी. बिड़ला (GP Birla) की चिरस्थायी विरासत को श्रद्धांजलि है, जो एक दूरदर्शी व्यक्ति थे, जिनका शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में गहन योगदान पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा

जीपी बिड़ला मेमोरियल पुरस्कार का एक विशिष्ट इतिहास

डॉ. वी नारायणन का सम्मान समारोह जीपी बिड़ला पुरातत्व खगोलीय एवं वैज्ञानिक संस्थान की अध्यक्ष निर्मला बिड़ला द्वारा आयोजित किया गया। जीपी बिड़ला मेमोरियल पुरस्कार का एक विशिष्ट इतिहास रहा है, और यह कई प्रतिष्ठित हस्तियों को प्रदान किया जा चुका है, जिनमें 32 नोबेल पुरस्कार विजेता शामिल हैं, जिनमें भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. वेंकटरमन रामकृष्णन भी शामिल हैं। अन्य उल्लेखनीय प्राप्तकर्ताओं में प्रसिद्ध सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी प्रो. जोगेश पति, भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और इसरो के पूर्व अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष सचिव डॉ. कस्तूरीरंगन शामिल हैं।

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Isro का प्रमुख कौन है?

वर्तमान समय में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख एस. सोमनाथ हैं। वे एक वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं और कई अंतरिक्ष अभियानों में नेतृत्व की भूमिका निभा चुके हैं। उनकी अगुवाई में भारत ने चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 जैसे ऐतिहासिक मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।

इसरो के प्रमुख केंद्र कौन से हैं?

मुख्य केंद्रों में बेंगलुरु स्थित इसरो मुख्यालय, श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम का विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र और हैदराबाद का राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र प्रमुख हैं। ये सभी केंद्र इसरो के अनुसंधान, प्रक्षेपण और संचालन कार्यों को मिलकर संचालित करते हैं।

Isro के जनक कौन थे?

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखने वाले डॉ. विक्रम साराभाई को इसरो का जनक कहा जाता है। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को भारत की प्रगति का माध्यम बनाया। उनकी दूरदर्शिता के कारण इसरो की स्थापना हुई और भारत ने आत्मनिर्भर अंतरिक्ष मिशनों की दिशा में कदम बढ़ाया।

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