हैदराबाद। सी.एस. रंगराजन, चिलकुर बालाजी मंदिर (Chilkur Balaji Temple) के मुख्य पुजारी, ने न्यायमूर्ति बी.आर. गवई की नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में डॉ. बी.आर. आंबेडकर चेयर प्रोफेसर (Dr. B.R. Ambedkar Chair Professor) (संवैधानिक कानून और सामाजिक समावेशन) के रूप में नियुक्ति का स्वागत किया है। रंगराजन ने इसे समयोचित कदम बताते हुए कहा कि डॉ. आंबेडकर संविधान को एक नैतिक दस्तावेज मानते थे। उनके अनुसार संवैधानिक नैतिकता की जड़ें धर्म में हैं, जो जीवन, गरिमा और समानता की रक्षा करती हैं, चाहे राजनीतिक या जनमत का दबाव कुछ भी हो।
जन्म या सामाजिक स्थिति से परे समानता का समर्थन करता है भारतीय संविधान
उन्होंने भारत की आध्यात्मिक परंपराओं और तिरुप्पन आलवार अम्मल सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संविधान जन्म या सामाजिक स्थिति से परे समानता का समर्थन करता है। यही मूल्य चिलकुर बालाजी मंदिर में लंबे समय से सामाजिक समावेशन और समान प्रवेश के रूप में अपनाए जाते रहे हैं।
संवैधानिक नैतिकता का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा आंबेडकर चेयर
रंगराजन ने कुछ दक्षिण एशियाई देशों से तुलना करते हुए कहा कि जहां मजबूत संवैधानिक नैतिकता का अभाव है, वहां अक्सर जीवन और गरिमा धार्मिक या राजनीतिक दबावों के कारण असुरक्षित हो जाती है। उन्होंने विश्वास जताया कि न्यायमूर्ति गवई के नेतृत्व में आंबेडकर चेयर संवैधानिक नैतिकता का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा। साथ ही, कानून, नैतिकता और सामाजिक सौहार्द को जोड़ने वाली इस पहल के लिए नालसार और तेलंगाना सरकार का आभार भी व्यक्त किया।
बालाजी मंदिर में क्या प्रसिद्ध है?
यहाँ आस्था, चमत्कार और विशेष रूप से संकट मोचन हनुमान की पूजा के लिए ख्याति मानी जाती है। भक्त मनोकामना पूर्ति, भूत-प्रेत बाधा निवारण और मानसिक शांति के लिए दर्शन करते हैं। मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़, आरती और परंपरागत अनुष्ठान प्रसिद्ध हैं।
बालाजी मंदिर कहां स्थित है?
मुख्य रूप से यह मंदिर राजस्थान के दौसा जिले के मेहंदीपुर क्षेत्र में स्थित माना जाता है। अरावली पर्वतमाला के निकट बसे इस धार्मिक स्थल तक सड़क मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है। देशभर से श्रद्धालु नियमित रूप से यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।
राजस्थान में कौन सा बालाजी मंदिर प्रसिद्ध है?
राज्य में मेहंदीपुर बालाजी मंदिर सबसे अधिक प्रसिद्ध माना जाता है। यह हनुमान जी के शक्तिशाली स्वरूप के लिए जाना जाता है। यहाँ विशेष पूजा-पाठ, झाड़-फूँक और धार्मिक मान्यताओं के कारण दूर-दूर से भक्त बड़ी संख्या में पहुँचते हैं।
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