हैदराबाद। अंतर्राष्ट्रीय बीज परीक्षण संघ (ISTA) की कार्यकारी समिति के सदस्य आज सचिवालय में मुख्य सचिव से मिले। इस प्रतिनिधिमंडल में अमेरिका, इटली, फ्रांस, फिलीपींस, पोलैंड, अर्जेंटीना, उरुग्वे और स्विट्ज़रलैंड सहित 11 देशों के सदस्य शामिल थे। बैठक में बीज गुणवत्ता सुनिश्चित करने और अन्य संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। आईएसटीए कार्यकारी बैठक 2026 15-21 फरवरी, तक हैदराबाद में आयोजित की जा रही है। समिति का नेतृत्व आईएसटीए सचिवालय, भारत के केशवुलु कुमुसोठ (Keshavulu Kumusoth) कर रहे हैं। बैठक का उद्देश्य वैश्विक बीज मानकों का समर्थन करना और अंतरराष्ट्रीय बीज आपूर्ति में भारत की भूमिका को मजबूत करना है।
सतत कृषि विकास में भी देगा योगदान
मुख्य सचिव से मुलाकात के दौरान बताया गया कि इस बैठक के आयोजन से वैश्विक स्तर पर हैदराबाद और भारत की दृश्यता, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि तेलंगाना को वैश्विक बीज उत्पादन और निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करना राज्य को ‘भारत की बीज राजधानी’ के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ सतत कृषि विकास में भी योगदान देगा। राज्य के कृषि-जलवायु और लॉजिस्टिक फायदे, मजबूत वैज्ञानिक आधार, कुशल बीज उत्पादक, विविध बीज प्रणालियाँ और अनुकूल बीज नीतियाँ इसे अनुसंधान, उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात के लिए विशेष रूप से प्रतिस्पर्धी बनाती हैं।आईएसटीए सचिवालय, भारत के केशवुलु ने कहा कि तेलंगाना 2047 तक वैश्विक बीज हब के रूप में उभरेगा।
बीज अनुसंधान केंद्र कहाँ स्थित है?
भारत का प्रमुख बीज अनुसंधान संस्थान ICAR-Indian Institute of Seed Science में स्थित है। यह संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्य करता है। यहां बीज उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, भंडारण और नई किस्मों के विकास पर शोध किया जाता है। इसका उद्देश्य किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराना और कृषि उत्पादकता बढ़ाना है।
क्या भारत अंतर्राष्ट्रीय बीज संधि का हिस्सा है?
भारत International Treaty on Plant Genetic Resources for Food and Agriculture का सदस्य है। यह संधि खाद्य और कृषि के लिए पौध आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण और न्यायसंगत उपयोग को बढ़ावा देती है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच बीज और पौध सामग्री के आदान-प्रदान को सहयोगात्मक ढंग से संचालित करना है।
Seed कितने प्रकार के होते हैं?
बीज मुख्य रूप से दो प्रकार के माने जाते हैं—एकबीजपत्री (Monocot) और द्विबीजपत्री (Dicot)। एकबीजपत्री में एक भ्रूणपत्र होता है, जैसे गेहूं और धान। द्विबीजपत्री में दो भ्रूणपत्र होते हैं, जैसे चना और मटर। इसके अलावा उपयोग के आधार पर प्रमाणित बीज, संकर बीज और देशी बीज जैसी श्रेणियां भी होती हैं।
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