हैदराबाद। तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंदर राव (N. Ramchander Rao) ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के उस बयान पर कड़ा पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक पारित करने के लिए केंद्र सरकार से राजीव गांधी से प्रेरणा लेने की बात कही थी। रामचंदर राव ने कहा कि यह बयान न केवल आपत्तिजनक (Objectionable) है बल्कि विरोधाभासी भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पास 400 से अधिक सांसदों का प्रचंड बहुमत होने के बावजूद उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक पारित करने के लिए उस जनादेश का उपयोग नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने का लिया निर्णय
उन्होंने आगे कहा कि उस समय कांग्रेस सरकार ने शह बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने का निर्णय लिया, जिससे एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला के भरण-पोषण के अधिकार प्रभावित हुए। उनके अनुसार, यह घटना कांग्रेस पार्टी के महिला अधिकारों को लेकर वास्तविक रुख को उजागर करती है। बीजेपी अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने दशकों तक महिला आरक्षण विधेयक को टालने और रोकने का काम किया। उन्होंने कहा कि ऐसे में कांग्रेस नेताओं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को महिला सशक्तिकरण पर उपदेश देने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान केंद्र सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं और विपक्ष की आलोचनाएं राजनीतिक अवसरवाद से प्रेरित हैं।
भारत में महिला आरक्षण कब लागू हुआ था?
स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था वर्ष 1993 में लागू की गई थी। 73वें और 74वें संविधान संशोधन के जरिए पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को आरक्षण दिया गया। बाद में कई राज्यों ने यह प्रतिशत बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया। संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण से जुड़ा कानून भी हाल के वर्षों में पारित किया गया है। इसका उद्देश्य महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना माना जाता है।
33 महिला आरक्षण क्या है?
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें सुरक्षित रखने की व्यवस्था को महिला आरक्षण कहा जाता है। इसका उद्देश्य राजनीति और प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। लंबे समय से इस विषय पर सामाजिक और राजनीतिक चर्चा होती रही है। आरक्षण व्यवस्था के माध्यम से महिलाओं को नेतृत्व और निर्णय लेने के अधिक अवसर देने का प्रयास किया जाता है। इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
महिलाओं के लिए 35 आरक्षण क्या है?
कुछ राज्यों और सरकारी विभागों में महिलाओं को 35 प्रतिशत तक आरक्षण या विशेष प्राथमिकता दी जाती है। यह व्यवस्था नौकरी, शिक्षा और अन्य सरकारी सेवाओं में लागू हो सकती है। अलग-अलग राज्यों में इसके नियम और प्रतिशत अलग हो सकते हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं को अधिक रोजगार और अवसर उपलब्ध कराना है। कई सरकारी भर्तियों में महिलाओं के लिए विशेष सीटें निर्धारित की जाती हैं।
भारत में औरतों के लिए आरक्षण व्यवस्था क्या है?
देश में महिलाओं को पंचायत, नगर निकाय, शिक्षा और कुछ सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सुविधा दी जाती है। कई राज्यों में स्थानीय निकाय चुनावों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत तक सीटें आरक्षित हैं। सरकारी योजनाओं और नीतियों के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में अवसर बढ़ाना इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य माना जाता है।
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