बीआरएस पर भुवनगिरि सांसद का तीखा हमला
हैदराबाद। भुवनगिरि के सांसद चामला किरण कुमार रेड्डी (Kiran Kumar Reddy) ने बीआरएस पार्टी और उसके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बीआरएस अब राजनीतिक रूप से समाप्त हो चुकी है और उसे अपने “वर्धापन दिवस” मनाने के बजाय “वर्धंतियां” मनाने की स्थिति में पहुंच गई है। सांसद ने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें केवल फार्म हाउस से शासन चलाने की आदत है और राज्य व देश में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि उनकी पुत्री के बयानों पर अब तक कोई प्रतिक्रिया (Reaction) क्यों नहीं आई, क्या यह मौन सहमति मानी जाए?
अन्य मुद्दों पर ध्यान भटकाया जा रहा
किरण कुमार रेड्डी ने कहा कि शासन के दौरान केवल स्वार्थ देखा गया और अब आरोपों पर स्पष्टीकरण देने के बजाय अन्य मुद्दों पर ध्यान भटकाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ सांसदों के चुनाव को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री की भूमिका रही है। सांसद ने कहा कि संसद में कांग्रेस सांसदों ने अपने मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया है, लेकिन इसके बावजूद गलत बयानबाजी की जा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का दायित्व है कि वह जनता के मुद्दों को आगे लाए, न कि भ्रामक बयान दे।
हालिया आरोपों पर दिया जाए स्पष्ट जवाब
उन्होंने बीआरएस नेतृत्व से मांग की कि हालिया आरोपों पर स्पष्ट जवाब दिया जाए और अनावश्यक बयानबाजी से बचा जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी जनता के हित में शासन करने के लिए आगे बढ़ रही है और इसी दिशा में कार्य कर रही है। सांसद ने यह भी कहा कि किसी के जीवन के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करना उचित नहीं है और ऐसे बयानों से बचना चाहिए।
भुवनागिरी किले की कहानी क्या है?
इतिहास में प्रसिद्ध यह किला अपनी मजबूत संरचना और रणनीतिक स्थिति के लिए जाना जाता है। भुवनागिरी किला 10वीं शताब्दी के आसपास पश्चिमी चालुक्य शासक त्रिभुवनमल्ल विक्रमादित्य षष्ठम द्वारा बनवाया गया माना जाता है। यह विशाल एकाश्म पहाड़ी पर स्थित है, जिससे सुरक्षा मजबूत रहती थी। बाद में काकतीय, बहमनी और कुतुबशाही शासकों ने भी इसका उपयोग किया। यह किला आज भी तेलंगाना की ऐतिहासिक धरोहर माना जाता है।
भुवनागिरी पर किसने शासन किया?
शुरुआत में इस क्षेत्र पर पश्चिमी चालुक्य वंश का शासन था, जिन्होंने किले का निर्माण कराया। बाद में काकतीय राजाओं ने इसे अपने नियंत्रण में लिया और सामरिक दृष्टि से मजबूत बनाया। इसके बाद बहमनी सल्तनत और फिर कुतुबशाही शासकों ने भी यहां शासन किया। अलग-अलग कालों में यह किला कई राजवंशों के अधीन रहा और दक्षिण भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
यद्दाद्री भुवनागिरी किस राज्य में है?
यह जिला भारत के दक्षिणी भाग में स्थित तेलंगाना राज्य में आता है। यदाद्री भुवनागिरी जिला अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्थित यदाद्री लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। भुवनागिरी किला भी इसी जिले का प्रमुख ऐतिहासिक स्थल है। हैदराबाद के निकट होने के कारण यह क्षेत्र पर्यटन और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
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