Hyderabad : पर्यावरण कार्यकर्ता दुशर्ला सत्यनारायण पर हमले की मंत्री ने की निंदा

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हैदराबाद। तेलंगाना सरकार की वन, पर्यावरण एवं देवदाय विभाग की मंत्री कोंडा सुरेखा (Konda Surekha) ने पर्यावरणविद और जल अधिकार आंदोलनकारी दुशर्ला सत्यनारायण पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व और प्रकृति संरक्षण के प्रयासों पर हमला है। रविवार को मंत्री कोंडा सुरेखा ने हैदराबाद के निम्स अस्पताल पहुंचकर गंभीर रूप से घायल सत्यनारायण (Satyanarayan) का हालचाल जाना। उन्होंने डॉक्टरों से उनके इलाज की जानकारी ली और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

सत्यनारायण का योगदान अतुलनीय

मंत्री ने कहा कि सत्यनारायण का घायल शरीर किसी उजड़े हुए जंगल की तरह दिखाई दे रहा है, जो बेहद दुखद है। उन्होंने बताया कि सत्यनारायण ने हरित विकास और जल संसाधनों के अधिकार के लिए कई संघर्ष किए हैं और उनका योगदान अतुलनीय है। मंत्री ने नलगोंडा जिले में फ्लोरोसिस की समस्या के समाधान के लिए जल साधन समिति के संस्थापक के रूप में उनके प्रयासों को सराहा। उन्होंने कहा कि सत्यनारायण ने नलगोंडा से दिल्ली तक पदयात्राएं कर लोगों को इस गंभीर समस्या के प्रति जागरूक किया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सामने फ्लोरोसिस पीड़ितों को प्रस्तुत कर उन्होंने इस समस्या की गंभीरता देश के सामने रखी थी।

की जाए सख्त कानूनी कार्रवाई

मंत्री सुरेखा ने नलगोंडा के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि हमले में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि सत्यनारायण ने 70 एकड़ में मानव निर्मित वन विकसित कर जैव विविधता को बढ़ावा दिया है। इस वन क्षेत्र के संरक्षण के लिए वन महोत्सव कार्यक्रम के तहत सरकार की ओर से सहायता प्रदान की जाएगी। मंत्री ने विश्वास जताया कि प्रकृति की कृपा से ही सत्यनारायण इस हमले में बच पाए हैं और वे जल्द स्वस्थ होकर फिर से पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में जुटेंगे। साथ ही उन्होंने राज्य के लोगों से अपील की कि वे सत्यनारायण से प्रेरणा लेकर विशेष अवसरों पर पौधारोपण करें और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में योगदान दें।

पर्यावरण के 4 प्रकार कौन से हैं?

सामान्यतः चार प्रमुख प्रकारों में बाँटा जाता है—प्राकृतिक पर्यावरण, सामाजिक पर्यावरण, सांस्कृतिक पर्यावरण और मानव निर्मित पर्यावरण। प्राकृतिक पर्यावरण में वायु, जल, भूमि, वन और जीव-जंतु शामिल होते हैं। सामाजिक पर्यावरण में समाज, संबंध और जीवनशैली आती है। सांस्कृतिक पर्यावरण में परंपराएँ, भाषा और रीति-रिवाज शामिल हैं। मानव निर्मित पर्यावरण में सड़कें, भवन, उद्योग और अन्य कृत्रिम संरचनाएँ आती हैं।

पर्यावरण का क्या अर्थ है?

अर्थ हमारे चारों ओर मौजूद सभी प्राकृतिक और मानवीय तत्वों से है, जो जीवन को प्रभावित करते हैं। इसमें वायु, जल, भूमि, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, जलवायु और मानव समाज सभी शामिल होते हैं। यही तत्व मिलकर जीवन के लिए आवश्यक संतुलन बनाते हैं। स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण स्वस्थ जीवन के लिए बहुत जरूरी है, इसलिए इसका संरक्षण करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी मानी जाती है।

पर्यावरण के जनक कौन थे?

अध्ययन के क्षेत्र में अलग-अलग विद्वानों का योगदान रहा है, लेकिन आधुनिक पर्यावरण आंदोलन के संदर्भ में अमेरिकी वैज्ञानिक Rachel Carson को महत्वपूर्ण माना जाता है। उनकी पुस्तक Silent Spring ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति विश्वभर में जागरूकता बढ़ाई। भारत में Sunderlal Bahuguna को पर्यावरण संरक्षण का प्रमुख चेहरा माना जाता है, जिन्होंने चिपको आंदोलन के माध्यम से प्रकृति बचाने का संदेश दिया।

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Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

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