Politics : कविता के आरोपों पर सांसद मल्लू रवि का पलटवार, बयान वापस लेने की मांग

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सांसद मल्लू रवि
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हैदराबाद। कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने बीआरएस नेता (BRS Leader) कविता के उस बयान पर कड़ा पलटवार किया, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के शासन को “हिटलर जैसा” बताया था। मल्लू रवि ने इन टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि तेलंगाना में “रामराज्य” जैसा सुशासन चल रहा है, ऐसे में कविता को हिटलर शासन कैसे नजर आ रहा है। उन्होंने मांग की कि कविता अपने बयान तुरंत वापस लें और जनता के बीच जाकर सच्चाई बताएं। उन्होंने कहा कि कविता (Kavitha) की बैठकों में आने वाले लोगों से ही वास्तविक स्थिति का पता चल सकता है।

कविता को नई पार्टी बनाने का अधिकार

मल्लू रवि ने कहा कि कविता को नई पार्टी बनाने का अधिकार है, और पारिवारिक स्तर पर पिता-पुत्री के बीच बातचीत अलग विषय है, लेकिन मुख्यमंत्री और कांग्रेस पर इस तरह की टिप्पणी करने का उन्हें अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कविता ने बीआरएस और टीआरएस में दस वर्षों तक महत्वपूर्ण पदों का लाभ उठाया। लिकर केस में गिरफ्तारी के दौरान पार्टी की ओर से उचित समर्थन न मिलने के कारण ही वह अलग हुईं। सांसद ने सवाल उठाया कि दस साल सत्ता में रहने के बावजूद बीआरएस सरकार ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा क्यों लागू नहीं की।

वर्तमान सरकार यह सुविधा दे रही

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार यह सुविधा दे रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि पहले केवल मोटा चावल दिया जाता था, जबकि अब सरकार बेहतर गुणवत्ता वाला चावल उपलब्ध करा रही है। उन्होंने यह भी पूछा कि कविता ने अपने कार्यकाल के दौरान कैबिनेट में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व न मिलने पर अपने ही नेतृत्व से सवाल क्यों नहीं किया। मल्लू रवि ने आरोप लगाया कि बीआरएस शासन के दौरान राज्य को कई वर्षों पीछे धकेल दिया गया।

तेलंगाना में हिंदुओं की आबादी कितनी है?

हिंदू आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का सबसे बड़ा हिस्सा है। जनगणना के अनुसार लगभग 85 प्रतिशत लोग हिंदू धर्म का पालन करते हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में हिंदू समुदाय व्यापक रूप से निवास करता है। राज्य के प्रमुख त्योहार जैसे बोनालु, बथुकम्मा, दशहरा और दीपावली बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं। सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन पर हिंदू परंपराओं का गहरा प्रभाव देखा जाता है।

तेलंगाना राज्य का मुख्य भोजन क्या है?

मुख्य भोजन चावल आधारित माना जाता है, जिसे दाल, सब्जी और मसालेदार करी के साथ खाया जाता है। यहां ज्वार और बाजरा भी काफी लोकप्रिय हैं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में। हैदराबादी बिरयानी, सरवा पिंडी, सकिनालु और पच्ची पुलुसु जैसे व्यंजन बहुत प्रसिद्ध हैं। तीखा और मसालेदार स्वाद यहां के भोजन की खास पहचान है। स्थानीय खानपान में पारंपरिक और आधुनिक स्वाद का सुंदर मेल मिलता है।

तेलंगाना का दूसरा नाम क्या है?

ऐतिहासिक रूप से “त्रिलिंग देश” या “तेलंग देश” भी कहा जाता है। माना जाता है कि यह नाम तीन प्रमुख शिवलिंग स्थलों—कालेश्वरम, श्रीशैलम और द्राक्षारामम—से जुड़ा है। समय के साथ यही नाम बदलकर तेलंगाना बना। कुछ लोग इसे दक्कन क्षेत्र का महत्वपूर्ण भाग भी मानते हैं। इसकी समृद्ध संस्कृति, भाषा और इतिहास ने इसे भारत के विशिष्ट राज्यों में विशेष पहचान दी है।

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Ajay Kumar Shukla

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Ajay Kumar Shukla

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