19 लाख ट्रक सड़कों से हटे, माल भाड़ा 15% तक बढ़ा
नई दिल्ली: देश में डीजल की बढ़ती कीमतों और किल्लत के कारण ट्रांसपोर्ट सेक्टर बड़े संकट में घिर गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत(India) के कुल 95 लाख ट्रकों में से करीब 20 प्रतिशत यानी 19 लाख ट्रकों के पहिए थम गए हैं और ट्रांसपोर्टर्स ने उन्हें खड़ा करना शुरू कर दिया है। पिछले 11 दिनों में ही पेट्रोल-डीजल के दाम ₹7.5 से ₹8 प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं। इस भारी बढ़ोतरी की वजह से नेशनल हाईवे पर बने पेट्रोल पंपों पर तेल के लिए ट्रकों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
Diesel: माल भाड़े में उछाल और आम जनता पर महंगाई का खतरा
डीजल के ऊंचे दामों का सीधा असर अब माल ढुलाई पर दिखने लगा है। ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने मुख्य रूट्स (जैसे पश्चिम से उत्तर भारत) पर माल भाड़े में 10 से 15% तक की बढ़ोतरी कर दी है, जबकि 30 किलोमीटर तक की लोकल ढुलाई के दाम इससे भी ज्यादा बढ़ गए हैं। भाड़ा महंगा होने का यह बोझ जल्द ही आम जनता की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि आने वाले दिनों में फल, सब्जी, राशन और अन्य जरूरी खाने-पीने के सामान की कीमतें बढ़ने की पूरी आशंका है।
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छोटे ऑपरेटर्स की मुसीबत और थोक-रिटेल का गणित
भारत के ट्रांसपोर्ट सेक्टर में 70% से ज्यादा छोटे ऑपरेटर्स हैं, जिनके कुल खर्च का 45% हिस्सा डीजल में जाता है। पंपों द्वारा उधार तेल देना बंद करने से इनके सामने वर्किंग कैपिटल (रोजमर्रा के खर्च का पैसा) का संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा, थोक (बल्क) डीजल की कीमत रिटेल से ₹40-42 प्रति लीटर महंगी होने के कारण बड़े इंडस्ट्रियल खरीदार भी अब आम पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगा रहे हैं। हालांकि, सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि यह किल्लत सिर्फ कुछ स्थानीय इलाकों में है और मानसून शुरू होने पर मांग घटने के साथ स्थिति सुधर जाएगी।
डीजल महंगा होने का देश के ट्रांसपोर्ट सिस्टम और आम जनता पर क्या असर पड़ा है?
डीजल महंगा होने से देश के करीब 20% (19 लाख) ट्रक सड़कों से हट गए हैं। ट्रांसपोर्टर्स ने माल भाड़ा 10 से 15% तक बढ़ा दिया है, जिसके कारण आने वाले समय में फल, सब्जी और राशन जैसी रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं।
रिटेल पेट्रोल पंपों पर ट्रकों की लंबी लाइनें लगने और भीड़ बढ़ने की मुख्य वजह क्या है?
थोक (बल्क/इंडस्ट्रियल) डीजल की कीमत आम रिटेल डीजल से ₹40-42 प्रति लीटर ज्यादा हो गई है। इस भारी अंतर के कारण बड़ी कंपनियां और संस्थान थोक के बजाय आम रिटेल पेट्रोल पंपों से तेल खरीद रहे हैं, जिससे वहां डीजल की सप्लाई कम पड़ रही है और ट्रकों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
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