निवेश और कीमतों में उछाल का विश्लेषण
नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार में चांदी ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़(Gold) दिए हैं और ₹2,82,720 प्रति किलो के नए शिखर(New Peaks) पर पहुंच गई है। महज चार दिनों के भीतर इसकी कीमत में ₹40,000 का उछाल देखा गया है, जो इसकी बढ़ती मांग को दर्शाता है। वहीं सोने की बात करें, तो हालांकि आज इसमें मामूली गिरावट रही, लेकिन यह अभी भी ₹1.41 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। 2025 का साल कीमती धातुओं के लिए शानदार रहा, जहां सोने ने 75% और चांदी ने 167% का रिटर्न देकर निवेशकों को मालामाल कर दिया।
वैश्विक और औद्योगिक कारणों का प्रभाव
सोने(Gold) और चांदी की इन कीमतों के पीछे कई ठोस वैश्विक कारण हैं। अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती के कारण डॉलर का कमजोर होना और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की ओर मोड़ा है। चांदी के मामले में, इसकी औद्योगिक मांग सबसे बड़ा फैक्टर बनकर उभरी है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी के बढ़ते उपयोग ने इसे केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि एक अनिवार्य कच्चा माल बना दिया है। इसके साथ ही, चीन जैसे देशों द्वारा बड़े पैमाने पर गोल्ड रिजर्व जमा करने से भी बाजार में तेजी बनी हुई है।
अन्य पढ़े: रेलवन एप का धमाका
शुद्धता की पहचान और स्थानीय कीमतों में अंतर
आभूषण खरीदते समय अक्सर ग्राहकों को अलग-अलग शहरों में अलग-अलग रेट मिलते हैं, जिसका मुख्य कारण IBJA के रेट में GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मुनाफा शामिल न होना है। निवेश के साथ-साथ शुद्धता की पहचान भी जरूरी है। असली चांदी की पहचान के लिए ‘आइस टेस्ट’ सबसे प्रभावी है क्योंकि चांदी ऊष्मा का बेहतरीन सुचालक है और इस पर बर्फ तेजी से पिघलती है। इसके अलावा, मैग्नेट टेस्ट और सफेद कपड़े से रगड़कर काले निशान की जांच करना भी शुद्धता परखने के पारंपरिक और आसान तरीके हैं।
चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी क्यों आ रही है?
चांदी की कीमतों में अधिक उछाल(Gold) का मुख्य कारण इसकी दोहरी भूमिका है। यह निवेश के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण औद्योगिक धातु भी है। ग्रीन एनर्जी की बढ़ती मांग के कारण सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों में इसका इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है। साथ ही, सप्लाई कम होने और कंपनियों द्वारा भविष्य के लिए स्टॉक जमा करने की वजह से चांदी की कीमतें सोने की तुलना में तेजी से बढ़ रही हैं।
क्या आम आदमी के लिए इस ऊंचे स्तर पर सोना-चांदी खरीदना सही है?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव और औद्योगिक मांग को देखते हुए लंबी अवधि के लिए निवेश अभी भी फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, कीमतें अपने ऑल-टाइम हाई पर हैं, इसलिए एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय ‘सिप’ (SIP) या टुकड़ों में खरीदारी करना बेहतर रणनीति हो सकती है। इसके अलावा, निवेश के लिए फिजिकल गोल्ड/सिल्वर के बजाय डिजिटल गोल्ड या ईटीएफ (ETF) पर विचार किया जा सकता है जिसमें मेकिंग चार्ज का बोझ नहीं होता।
अन्य पढ़े: