निवेश के सुरक्षित ठिकाने की ओर बढ़ता रुझान
नई दिल्ली: भारतीय बाजार में सोने(Gold) और चांदी की कीमतें लगातार पांचवें दिन अपने उच्चतम स्तर (All-time High) पर पहुंच गई हैं। 24 कैरेट सोने की कीमत अब ₹1.38 लाख प्रति 10 ग्राम को पार कर गई है, जबकि चांदी ने ₹2.43 लाख प्रति किलो का आंकड़ा छू लिया है। इस साल की शुरुआत से अब तक सोने में लगभग ₹62,000 और चांदी में ₹1.57 लाख से ज्यादा की बढ़त देखी गई है, जो यह दर्शाता है कि कीमती धातुएं इस समय सबसे बेहतर प्रदर्शन(Better Performance) करने वाली संपत्ति बनी हुई हैं।
वैश्विक और औद्योगिक कारणों का असर
कीमतों में इस उछाल के पीछे कई बड़े वैश्विक कारण हैं। अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की संभावना से डॉलर कमजोर हुआ है, जिससे निवेशकों के लिए सोना(Gold) खरीदना सस्ता और आकर्षक हो गया है। साथ ही, रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे भू-राजनीतिक तनावों के कारण लोग सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने की ओर भाग रहे हैं। चांदी की बात करें तो इसकी बढ़ती औद्योगिक मांग, विशेषकर सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में इसके उपयोग ने इसे एक महत्वपूर्ण कच्चा माल बना दिया है, जिससे इसकी मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर पैदा हो गया है।
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भविष्य का अनुमान और निवेशकों की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में तेजी का यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है। केडिया एडवाइजरी के अनुसार, चांदी अगले एक साल में ₹2.75 लाख तक पहुंच सकती है, जबकि सोना(Gold) ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम का स्तर छू सकता है। विभिन्न शहरों में रेट अलग होने का मुख्य कारण स्थानीय टैक्स, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मार्जिन होता है। भविष्य में ट्रम्प की टैरिफ नीतियों और केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार की जा रही सोने की खरीदारी कीमतों को और ऊपर ले जा सकती है।
IBJA द्वारा घोषित रेट और शोरूम के रेट में अंतर क्यों होता है?
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) जो रेट जारी करता है, उसमें 3% GST, गहनों के मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का अपना मुनाफा (मार्जिन) शामिल नहीं होता है। जब आप शोरूम से सोना(Gold) खरीदते हैं, तो ये सभी शुल्क जुड़ जाते हैं, जिससे अंतिम कीमत IBJA के रेट से अधिक हो जाती है।
चांदी की कीमतों में सोने से भी अधिक तेजी आने का मुख्य कारण क्या है?
चांदी की तेजी का मुख्य कारण इसकी ‘इंडस्ट्रियल डिमांड’ है। आजकल सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन में चांदी का भारी उपयोग हो रहा है। इसके अलावा, ग्लोबल सप्लाई चेन में कमी और कंपनियों द्वारा भविष्य की जरूरतों के लिए स्टॉक जमा करने की होड़ ने चांदी की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है।
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